INOX India ने Q1 FY27 के नतीजों में अपनी अब तक की सबसे बड़ी ऑर्डर बुक दर्ज की है, जो **₹1,686 करोड़** पर पहुंच गई है। हालांकि, ग्लोबल लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण कंपनी की रेवेन्यू रिकग्निशन में कुछ रुकावटें जरूर आई हैं, लेकिन एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर सेक्टर में कंपनी की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है।
चुनौतियों के बीच मजबूत डिमांड
INOX India ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹382 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 8.3% अधिक है। कंपनी के पास ऑर्डर्स की कमी नहीं है, लेकिन सप्लाई चेन की दिक्कतों ने काम में थोड़ी अड़चन डाली है। गल्फ रीजन में चल रहे तनाव और शिपिंग में आ रही भारी दिक्कतों की वजह से ₹32 करोड़ से ₹35 करोड़ के तैयार उपकरण समय पर डिलीवर नहीं किए जा सके।
मार्जिन और मुनाफे की स्थिति
इतनी चुनौतियों के बाद भी कंपनी ने अपने ऑपरेटिंग प्रदर्शन को संभाले रखा है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 23.5% पर स्थिर रहा, जो कि उनकी सालाना गाइडेंस (21% से 24%) के दायरे में है। वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹61 करोड़ पर स्थिर बना रहा।
एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर पर फोकस
कंपनी अब हाई-वैल्यू मार्केट की तरफ अपना रुख कर रही है। AS9100D सर्टिफिकेशन हासिल करने के बाद, INOX India अब रॉकेट प्रोपेलेंट टैंक जैसे कॉम्प्लेक्स पार्ट्स बना रही है। स्पेस सेक्टर के एक बड़े क्लाइंट से ही कंपनी को ₹1,000 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर एक्सपोजर मिला है। इसके अलावा, धौलरा रीजन में सेमीकंडक्टर फैसिलिटीज़ के लिए भी कंपनी को काम मिल रहा है।
भविष्य की तैयारी और बैलेंस शीट
कंपनी अभी पूरी तरह से नेट डेट-फ्री (Net Debt-Free) है, जो इसे मजबूती देता है। कंपनी का नया कांधला (Kandla) प्लांट 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक चालू होने की उम्मीद है। यह विस्तार एयरोस्पेस और क्रायोजेनिक कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। इन्वेस्टर्स को फिलहाल शिपिंग रूट्स के सामान्य होने और कांधला यूनिट की कमीशनिंग पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कंपनी का पूरा बिजनेस बड़े प्रोजेक्ट-बेस्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर टिका है।
