INOX India (INOXCVA) ने फ्रांस में चल रहे ITER फ्यूजन रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए क्रिटिकल वैक्यूम-वेसल थर्मल शील्ड्स की सफलतापूर्वक मरम्मत पूरी कर ली है। यह उपलब्धि कंपनी की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण है, वहीं Q1 FY27 में कंपनी की रेवेन्यू में **9.18%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बड़ी इंजीनियरिंग कामयाबी
वडोदरा स्थित INOX India (INOXCVA) ने फ्रांस में मौजूद इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) प्रोजेक्ट में एक बड़ी तकनीकी चुनौती को पार किया है। प्रोजेक्ट के थर्मल शील्ड्स में क्लोरीन कंटामिनेशन के कारण सूक्ष्म दरारें आ गई थीं। कंपनी ने 11 किलोमीटर पाइपिंग को हटाने और बदलने के साथ-साथ थर्मल पैनल्स की सटीक मशीनिंग का काम पूरा किया। यह काम इतनी बारीकी से किया गया कि फ्यूजन कोर के साथ ये उपकरण पूरी तरह फिट हो गए।
क्रायोजेनिक सेक्टर में दबदबा
कंपनी 2014 से ही इस प्रोजेक्ट से जुड़ी है। यह काम कंपनी की उन क्षमताओं को दर्शाता है जो 4 केल्विन तापमान पर मैग्नेट्स को मैनेज करने जैसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में काम कर सकती हैं, जबकि प्लाज्मा कोर का तापमान 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है।
फाइनेंशियल रिपोर्ट
फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹370.79 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 9.18% ज्यादा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹58.07 करोड़ दर्ज किया गया। निवेशक अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि कंपनी अपनी टॉप-लाइन ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच कैसे संतुलन बनाए रखती है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
3 सितंबर, 2026 तक कंपनी का शेयर प्राइस लगभग ₹2,180.15 पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि यह प्रोजेक्ट कंपनी की साख बढ़ाता है, लेकिन भविष्य में कुछ जोखिम भी हैं:
- कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव: यह ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर डाल सकता है।
- प्रोजेक्ट की जटिलता: हाई-प्रिसिजन क्रायोजेनिक प्रोजेक्ट्स में देरी या लागत बढ़ने का रिस्क हमेशा रहता है।
- करेंसी फ्लक्चुएशन: एक एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनी होने के नाते करेंसी का उतार-चढ़ाव मुनाफे को प्रभावित कर सकता है।
निवेशक अब कंपनी के 23.8% के ऐतिहासिक EBITDA मार्जिन और ऑर्डर बुक के विस्तार पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
