यह बड़ी योजना IIFCL के लिए एक अहम कदम है, क्योंकि कंपनी फिलहाल मार्च 2026 तक नौ InvITs में ₹3,000 करोड़ का निवेश कर चुकी है और अगले एक साल में इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखती है। मैनेजिंग डायरेक्टर रोहित ऋषि ने बताया कि यह विस्तार ट्रांसपोर्ट, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी जैसे सेक्टर्स में InvITs की क्षमता को भुनाने के लिए है। यह कदम देश के 'Viksit Bharat' लक्ष्य के साथ भी जुड़ा है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण इंजन माना जा रहा है।
IIFCL की मजबूत वित्तीय सेहत इस महत्वाकांक्षी योजना को बल दे रही है। दिसंबर 2025 तक, कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (Capital Adequacy Ratio) 21% पर मजबूत है और नेट एनपीए (NPA) सिर्फ 0.3% है। हाल के नतीजों में भी शानदार प्रदर्शन दिखा है, जहां फाइनेंशियल ईयर मार्च 2025 के लिए नेट प्रॉफिट ₹2,165 करोड़ रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹1,552 करोड़ से 39% ज्यादा है। इसी फाइनेंशियल ईयर में रिकॉर्ड ₹51,124 करोड़ की सैंक्शंस और ₹28,501 करोड़ का डिस्बर्समेंट हुआ था। वहीं, 31 जनवरी 2026 तक सैंक्शंस बढ़कर ₹53,217 करोड़ और डिस्बर्समेंट ₹25,470 करोड़ तक पहुंच गए, जो ग्रोथ की रफ्तार को दर्शाता है।
भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़ी उछाल देखी जा रही है, जिसमें कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए बड़े निवेश की योजनाएं हैं। InvITs, इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स को मॉनेटाइज करने और नए प्रोजेक्ट्स के लिए कैपिटल जुटाने का एक अहम जरिया बनकर उभरे हैं। Crisil Ratings का अनुमान है कि FY2027 तक InvITs के तहत करीब ₹8 ट्रिलियन के एसेट्स होंगे, जिसमें रोड सेक्टर सबसे आगे रहेगा। IIFCL का InvITs में बढ़ता दखल इसे इस बढ़ते बाजार का फायदा उठाने में मदद करेगा, साथ ही यह राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप भी है।
अपनी मजबूत वित्तीय परफॉर्मेंस और स्ट्रेटेजिक विस्तार के बावजूद, IIFCL को कुछ जोखिमों पर भी नजर रखनी होगी। इंफ्रा सेक्टर से जुड़े एसेट क्वालिटी के जोखिम हमेशा बने रहते हैं। हालांकि, मार्च 2025 तक कंपनी का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) 1.11% तक गिर गया है, जो मार्च 2020 के 19.70% की तुलना में काफी कम है, फिर भी एसेट क्वालिटी मैनेजमेंट महत्वपूर्ण होगा। InvITs आकर्षक यील्ड (yield) देते हैं, लेकिन सेकेंडरी मार्केट में इनका प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। IIFCL की सफलता इस एसेट क्लास में सटीक ड्यू डिलिजेंस (due diligence) और जोखिम प्रबंधन पर निर्भर करेगी। सरकार का समर्थन, जो इसके मेजॉरिटी शेयरहोल्डर होने और CRISIL (AAA/Stable) जैसी रेटिंग एजेंसियों से मिली रेटिंग्स में दिखता है, एक मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल सुनिश्चित करता है। कंपनी की आगामी IPO योजनाएं भी इसके कैपिटल बेस और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करेंगी।