IC Electricals के IPO में निवेशकों का उत्साह दूसरे दिन ही देखने लायक रहा। कंपनी का **₹47.9 करोड़** का इश्यू **62** गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हो गया है। रिटेल और नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की ओर से जबरदस्त खरीदारी हो रही है। यह कंपनी भारतीय रेलवे को इंजीनियरिंग सॉल्यूशन मुहैया कराती है और इसका इश्यू **7 जुलाई** को बंद हो जाएगा।
दूसरे दिन ही IPO में लगा 62 गुना का जोर!
नई दिल्ली स्थित IC Electricals, जो रेलवे सेक्टर के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने में माहिर है, के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में निवेशकों की भारी भागीदारी देखने को मिल रही है। 6 जुलाई को बोली प्रक्रिया के दूसरे दिन तक, कुल 61.83 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया। जनता के लिए पेश किए गए 34.71 लाख शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने 21.46 करोड़ से अधिक इक्विटी शेयरों के लिए बोलियां लगाईं।
रिटेल और NII की तरफ से दमदार मांग
इस ज़बरदस्त मांग का नेतृत्व मुख्य रूप से नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) और रिटेल खरीदारों ने किया है, जिन्होंने अपने लिए आरक्षित कोटे को क्रमशः 91.46 गुना और 91.69 गुना सब्सक्राइब किया। वहीं, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), जिनमें बड़े वित्तीय संस्थान शामिल हैं, ने अपने हिस्से का 3.1 गुना सब्सक्रिप्शन हासिल किया। यह सफल पहले दिन के बाद हुआ, जब IPO 6.57 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
IPO की संरचना और फंड का इस्तेमाल
IC Electricals इस फ्रेश इश्यू के जरिए 48.39 लाख शेयरों को बेचकर कुल ₹47.9 करोड़ जुटाना चाहती है। कंपनी ने प्रति शेयर ₹99 का प्राइस फिक्स किया है, जो प्राइस बैंड का ऊपरी स्तर है। पब्लिक लॉन्च से पहले, कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹13.54 करोड़ जुटाए थे, जिनमें Pine Oak Global Fund, SageOne, Bengal Finance and Investment, Akalpya India Equity Fund, और Arthasanchay Growth Fund शामिल हैं।
कंपनी अपनी नेट प्रोसीड्स में से लगभग ₹33.6 करोड़ का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी, जबकि शेष राशि का आवंटन सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। चूंकि पूरा ऑफर फ्रेश इश्यू है, इसलिए सभी फंड कंपनी को सीधे तौर पर मिलेंगे ताकि उसके ऑपरेशनल स्केल को सहारा मिल सके।
सेक्टर का संदर्भ और निवेशकों के लिए खास बातें
भारतीय रेलवे को सप्लाई करने वाली कंपनी होने के नाते, यह विशेष इंजीनियरिंग सेगमेंट में काम करती है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कंपनी का भविष्य का विकास रेलवे नेटवर्क के कैपिटल स्पेंडिंग साइकल्स और आधुनिकीकरण योजनाओं से जुड़ा हुआ है।
शेयरधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण निगरानी योग्य बात यह होगी कि कंपनी अपनी वर्किंग कैपिटल को कितनी कुशलता से प्रबंधित करती है, खासकर जब वह अपने व्यावसायिक संचालन का समर्थन करने के लिए नए फंड का उपयोग कर रही है। हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) - जो इस इश्यू के लिए अक्सर 45% के आसपास बताया जाता है - वर्तमान सेंटिमेंट को दर्शा सकता है, यह एक अनौपचारिक संकेतक है और भविष्य की लिस्टिंग परफॉर्मेंस की गारंटी नहीं देता। निवेशकों को कंपनी के लॉन्ग-टर्म ऑर्डर बुक एग्जीक्यूशन और औद्योगिक वस्तुओं के सेक्टर में कच्चे माल की लागत में उतार-चढ़ाव के मुकाबले प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। सब्सक्रिप्शन विंडो 7 जुलाई को बंद हो जाएगी, जिसके बाद एक्सचेंज पर शेयर आवंटन और लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू होगी।
