IC Electricals के ₹47.9 करोड़ के IPO में पहले दिन ही निवेशकों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बोली लगने के पहले ही दिन यह इश्यू **5 गुना** से ज्यादा सब्सक्राइब हो गया। कंपनी, जो रेलवे सेक्टर को इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स सप्लाई करती है, इस फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपने वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी।
क्या हुआ?
IC Electricals ने 3 जुलाई, 2026 को अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) खोला और शुरुआत से ही निवेशकों की ओर से शानदार भागीदारी देखी गई। कंपनी ₹94 से ₹99 प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर 48.39 लाख इक्विटी शेयर ऑफर कर रही है, जिससे वह कुल ₹47.9 करोड़ जुटाना चाहती है। बोली लगने के पहले ही दिन, कुल सब्सक्रिप्शन ऑफर साइज का 5.14 गुना पहुंच गया। रिटेल निवेशकों और नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NIIs) ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई, जिन्होंने अपने रिजर्व हिस्से से क्रमशः लगभग 8 गुना और 6.8 गुना बोली लगाई। वहीं, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने अब तक सतर्क रुख अपनाया है, उनका कोटा केवल 10% सब्सक्राइब हुआ है।
फंड का उपयोग और बिजनेस फोकस
इस IPO का मुख्य मकसद कंपनी की रोजमर्रा के ऑपरेशन्स के लिए वित्तीय मजबूती बढ़ाना है। IC Electricals जुटाए गए पैसों में से ₹33.6 करोड़ का उपयोग वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी, जो रेलवे उपकरण बनाने में आने वाली लागतों को मैनेज करने के लिए जरूरी हैं। बाकी बची हुई रकम को सामान्य कॉर्पोरेट गतिविधियों के लिए रखा जाएगा। कंपनी रेलवे सेक्टर के लिए विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स जैसे बैटरी चार्जर, इनवर्टर, ट्रैक्शन मोटर और इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम बनाने में माहिर है।
एंकर निवेशक की भागीदारी
पब्लिक के लिए IPO खुलने से पहले, कंपनी ने 2 जुलाई, 2026 को अपना एंकर बुक राउंड पूरा किया और सफलतापूर्वक ₹13.54 करोड़ जुटाए। इस सेगमेंट में Pine Oak Global Fund, SageOne-Flagship Growth OE Fund और Bengal Finance and Investment (जिसे निवेशक आशीष कचोलिया का समर्थन प्राप्त है) जैसे कई इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेंट्स ने रुचि दिखाई। एंकर पार्टिसिपेशन का इस्तेमाल अक्सर कंपनियां पब्लिक इश्यू से पहले इंस्टीट्यूशनल कॉन्फिडेंस दिखाने के लिए करती हैं।
ग्रे मार्केट की चाल
IPO से पहले के दिनों में, मार्केट ऑब्जर्वर्स ने बताया है कि शेयर ग्रे मार्केट में प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे थे। यह एक अनऑफिशियल प्लेटफॉर्म है जहां शेयर लिस्टिंग से पहले ही खरीदे-बेचे जाते हैं। हालांकि यह कुछ ट्रेडर्स के बीच सकारात्मक सेंटिमेंट दिखाता है, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम सट्टा आधारित होते हैं और अंतिम लिस्टिंग प्राइस या भविष्य के स्टॉक परफॉर्मेंस की गारंटी नहीं देते।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
यह IPO 7 जुलाई, 2026 तक खुला रहेगा। इच्छुक निवेशकों को सभी कैटेगरी में फाइनल सब्सक्रिप्शन नंबरों पर नज़र रखनी चाहिए, खासकर इंस्टीट्यूशनल सेगमेंट में, क्योंकि यह अक्सर लिस्टिंग डे पर प्राइस डिस्कवरी तय करता है। इसके अलावा, IPO से मिले पैसों का उपयोग करके कंपनी की वर्किंग कैपिटल को कुशलतापूर्वक मैनेज करने की क्षमता, शेयर ट्रेडिंग शुरू होने के बाद एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन इंडिकेटर होगी। निवेशकों को कंपनी के ऑफर डॉक्यूमेंट्स में बताए गए जोखिमों की भी सावधानीपूर्वक समीक्षा करनी चाहिए, विशेष रूप से रेलवे सेक्टर पर इसकी निर्भरता के संबंध में, जो व्यवसाय को सरकारी खर्च और ऑर्डर साइकल्स पर निर्भर बना सकता है।
