जापानी प्रिसिजन इंस्ट्रूमेंट कंपनी Horiba ने अपने भारतीय कारोबार के लिए बड़ा लक्ष्य रखा है। कंपनी FY2025 के **¥15 अरब** के रेवेन्यू से बढ़कर 2028 तक **¥20 अरब** का वार्षिक कारोबार हासिल करना चाहती है।
क्योटो स्थित प्रिसिजन टेस्टिंग और मेजरमेंट सिस्टम बनाने वाली दिग्गज कंपनी Horiba अब भारत में अपनी पकड़ और गहरी करने जा रही है। कंपनी का उद्देश्य सिर्फ सेल्स और सपोर्ट तक सीमित न रहकर, भारत को रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाना है।
लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
अब तक कई विदेशी इंजीनियरिंग कंपनियां भारत को केवल सर्विस बेस के तौर पर देखती थीं, लेकिन Horiba इस मॉडल को बदल रही है। फिलहाल कंपनी का 40% रेवेन्यू भारत में ही असेंबल या मैन्युफैक्चर होने वाले प्रोडक्ट्स से आता है। कंपनी के पास देश भर में 8 साइट्स हैं और 600 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं, जो अब इंपोर्टेड सिस्टम्स की जगह लोकल रिसर्च पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
सेमीकंडक्टर और डीप टेक पर फोकस
कंपनी का 40% रेवेन्यू बायो और हेल्थकेयर, 40% एनर्जी और एनवायरनमेंट, और बाकी 20% हिस्सा मटेरियल और सेमीकंडक्टर डिवीजन से आता है। जनवरी 2026 में गुजरात की कंपनी Pristine Deeptech का अधिग्रहण इसी दिशा में एक बड़ा कदम था। इस डील के जरिए Horiba ने लैब-ग्रोन डायमंड टेक्नोलॉजी हासिल की है, जो सेमीकंडक्टर और क्वांटम एप्लिकेशन के लिए बेहद जरूरी है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और मौके
पुणे में 'मास फ्लो कंट्रोलर्स' (Mass Flow Controllers) का उत्पादन कर रही Horiba की ग्रोथ काफी हद तक भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विकास पर टिकी है। हालांकि, नई टेक्नोलॉजी का इंटीग्रेशन और ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को मेंटेन रखना कंपनी के सामने एक एग्जीक्यूशन रिस्क भी बना रहेगा। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत का फैब्रिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर कितनी तेजी से विकसित होता है, क्योंकि इसी पर कंपनी का भविष्य का स्केल निर्भर करता है।
