प्रभ.ुदास लिल.ाधर (Prabhudas Lilladher) ने Hitachi Energy India की रेटिंग को 'Reduce' से बढ़ाकर 'Hold' कर दिया है। ब्रोकरेज फर्म ने शेयर के लिए ₹34,026 का नया टारगेट प्राइस तय किया है। यह अपग्रेड कंपनी के Q1 FY27 के शानदार नतीजों के बाद आया है।
नतीजों ने बदली ब्रोकरेज की राय
प्रभ.ुदास लिल.ाधर (Prabhudas Lilladher) ने Hitachi Energy India की रेटिंग को 'Reduce' से बढ़ाकर 'Hold' कर दिया है, और शेयर का नया टारगेट प्राइस ₹34,026 सेट किया है। यह फैसला कंपनी के 2027 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (Q1 FY27) के दमदार परफॉर्मेंस के बाद आया है, जिसमें कंपनी का बिजनेस ग्रोथ और ऑर्डर इनफ्लो उम्मीदों से कहीं बढ़कर रहा।
कमाई और मुनाफे में बंपर उछाल
Hitachi Energy India ने इस तिमाही में सालाना आधार पर 68.6% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ ₹2,493.69 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में तो और भी बड़ी छलांग देखी गई, जो 123.5% बढ़कर ₹294.15 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी भी सुधरी है, जिसका नतीजा है कि EBITDA मार्जिन 16.0% तक पहुंच गया। यह बेहतर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और फेवरेबल ऑपरेशनल लीवरेज का नतीजा है।
रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और ग्रोथ के इंजन
कंपनी के भविष्य के लिए सबसे बड़ा सहारा उसकी रिकॉर्ड ऑर्डर बुक है, जो 30 जून 2026 तक ₹32,222.1 करोड़ पर पहुंच गई है। कंपनी को रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर, तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटर्स और एक्सपोर्ट मार्केट्स से ज़बरदस्त डिमांड दिख रही है। इस बढ़ती हुई डिमांड को पूरा करने और लोकल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए, कंपनी वडोदरा के कारजन में ₹2,000 करोड़ का एक नया ग्रीनफील्ड प्लांट लगा रही है।
फिर भी क्यों बरती जा रही है सावधानी?
इतने मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म ने 'Buy' की जगह 'Hold' रेटिंग को बरकरार रखा है। इसकी मुख्य वजह शेयर का मौजूदा हाई वैल्यूएशन है। एनालिस्ट्स का यह भी मानना है कि कंपनी के हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) सेगमेंट का ऑर्डर बुक में बड़ा योगदान है। चूंकि HVDC के ऑर्डर अक्सर बहुत बड़े और अनियमित होते हैं, इसलिए ऑर्डर बुक कितनी तेजी से भरेगी, इसमें उतार-चढ़ाव आ सकता है।
निवेशकों को कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के टाइम पर एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी चाहिए। हालांकि मौजूदा पाइपलाइन मजबूत है, लेकिन आने वाली तिमाही के नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि कंपनी अपनी रिकॉर्ड ऑर्डर बुक को रेवेन्यू में कितनी प्रभावी ढंग से बदल पाती है। इसके अलावा, फॉरेन एक्सचेंज रेट में संभावित अस्थिरता और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे जोखिमों पर भी निवेशकों को ध्यान देना चाहिए, जो इस सेक्टर के लिए आम चुनौतियां बनी हुई हैं।
