Madhvani-Turner Group के अधिग्रहण के बाद, HNGIL अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने के लिए **₹500 करोड़** का बड़ा निवेश करने जा रही है। कंपनी अब प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) की राह पर वापस लौटने की तैयारी में है।
उत्पादन बढ़ाने पर जोर
सितंबर 2025 में ₹2,250 करोड़ के अधिग्रहण के बाद, कंपनी अब बड़े टर्नअराउंड मोड में है। चालू फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ₹500 करोड़ का और कैपिटल एक्सपेंडिचर करने वाली है ताकि एफिशिएंसी और प्रोडक्शन वॉल्यूम को और बेहतर किया जा सके।
रिकवरी का सफर
टेकओवर के समय कंपनी की क्षमता महज 1,100 टन प्रतिदिन थी, जिसे कंपनी ने बढ़ाकर 2,500 से 2,600 टन प्रतिदिन तक पहुंचा दिया है। हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित फर्नेस को फिर से शुरू करने से वहां आउटपुट दोगुना हो गया है। साथ ही, आंध्र प्रदेश का नायदुपेटा प्लांट अब एक्सपोर्ट के लिए एक मजबूत हब बनकर उभरा है, जिसकी क्षमता 650 टन प्रतिदिन है।
मुनाफे की राह और चुनौतियां
मैनेजमेंट का लक्ष्य चालू तिमाही में कंपनी को वापस मुनाफे में लाना है। हालांकि, इस सेक्टर में 25% खर्च सिर्फ फ्यूल और गैस पर होता है, जो मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। कंपनी अपनी बढ़ती वॉल्यूम के जरिए इन लागतों को मैनेज करने की कोशिश कर रही है।
एक्सपोर्ट और रिस्क
कंपनी अब यूरोप जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर फोकस कर रही है, जहां एनर्जी कॉस्ट बढ़ने से वहां के मैन्युफैक्चरर्स जूझ रहे हैं। निवेशकों को अब कंपनी की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर नज़र रखनी होगी, क्योंकि ग्लोबल डिमांड साइकिल कंपनी के बिजनेस को प्रभावित कर सकते हैं।
