भारत की 'क्रिटिकल मिनरल्स' (critical minerals) की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता को कम करने की राष्ट्रीय मंशा के तहत, Hindustan Zinc Limited (HZL) ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब सिर्फ जिंक और चांदी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश की संसाधन सुरक्षा (resource security) को मजबूत करने के लिए बहु-धातु (multi-metal) प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही है।
इसके तहत, HZL ने टंगस्टन (tungsten), पोटाश (potash) और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (rare earth elements) जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए माइनिंग ब्लॉक सुरक्षित कर लिए हैं। यह कदम सीधे तौर पर भारत के नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (National Critical Minerals Mission) से जुड़ता है, जिसे जनवरी 2025 में ₹34,300 करोड़ के फंड के साथ लॉन्च किया गया था। कंपनी टेक्नोलॉजी (technology) में निवेश और ग्लोबल पार्टनरशिप (global partnership) पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है, साथ ही इंटीग्रेटेड जिंक मैन्युफैक्चरिंग के लिए जिंक पार्क्स (Zinc Parks) इनिशिएटिव को भी आगे बढ़ा रही है।
हालिया नतीजों की बात करें तो, Q4 फाइनेंशियल ईयर 26 में HZL का नेट प्रॉफिट (Net Profit) 68% बढ़कर ₹5,033 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू (Revenue) में 44-49% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शेयर बाजार में, मई 2026 की शुरुआत में स्टॉक ₹590 से ₹630 के बीच रहा, और इसका P/E रेश्यो (P/E ratio) करीब 18-20.5 है, जिसे मौजूदा प्रदर्शन के हिसाब से उचित माना जा रहा है।
हालांकि, इस महत्वाकांक्षी विस्तार में कई चुनौतियाँ भी हैं। कंपनी को नए खनिजों के निष्कर्षण (extraction) और प्रसंस्करण (processing) के लिए बड़े कैपिटल (capital) निवेश की आवश्यकता होगी। मार्च 2025 तक कंपनी पर ₹115.36 अरब से ₹128.09 अरब तक का कुल कर्ज था। डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (debt-to-equity ratio) 0.87 और इंटरेस्ट कवरेज (interest coverage) 12.78x अभी भी कंट्रोल में हैं। लेकिन, वेदांता (Vedanta) को दिए गए बड़े डिविडेंड (dividend) भुगतान के कारण कर्ज बढ़ा है, जो भविष्य में ग्रोथ के फंड को सीमित कर सकता है।
HZL अपने 2X ग्रोथ प्लान के तहत ₹12,000 करोड़ की लागत से एक नया 250 KTPA स्मेल्टर (smelter) भी बना रही है। दुर्लभ पृथ्वी तत्वों जैसे खनिजों का खनन और प्रोसेसिंग बेहद जटिल और ऊर्जा-गहन है। इसमें चीन का दबदबा है, जिससे जियोपॉलिटिकल (geopolitical) और टेक्नोलॉजिकल (technological) चुनौतियाँ भी सामने आती हैं।
भविष्य की बात करें तो, HZL अपनी सिल्वर (silver) प्रोडक्शन क्षमता को FY27 तक 680 टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है और 2029 तक इसे कंपनी के कुल EBITDA का 50% योगदान देने की उम्मीद है। कंपनी यूरेनियम (uranium) माइनिंग में भी अवसर तलाश रही है। स्थिरता (Sustainability) के लिए, HZL FY28 तक 70% नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) का उपयोग करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
