Highway Infrastructure Shares: ऑर्डर की बारिश से शेयर में तूफानी तेजी, 1 महीने में **62%** उछला

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Highway Infrastructure Shares: ऑर्डर की बारिश से शेयर में तूफानी तेजी, 1 महीने में **62%** उछला

Highway Infrastructure के शेयरों में पिछले एक महीने के दौरान **62%** की शानदार रैली देखी गई है। कंपनी को हाल ही में **₹198 करोड़** का CPWD ऑर्डर और NHAI से बड़े टोल कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं। हालांकि, कंपनी अपना ऑर्डर बुक बढ़ाकर **₹1,776 करोड़** पर ले आई है, लेकिन निवेशकों को इसके कम प्रॉफिट मार्जिन और सिविल कंस्ट्रक्शन से जुड़े जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए।

बड़े ऑर्डर और बिजनेस में बदलाव

Highway Infrastructure का शेयर इन दिनों चर्चा में है। इस तेजी के पीछे की बड़ी वजह कंपनी का अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव है। अब कंपनी सिर्फ टोल ऑपरेटर नहीं, बल्कि एक डाइवर्सिफाइड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेयर बनने की ओर बढ़ रही है। कंपनी को हाल ही में सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) से मध्य प्रदेश में CISF फैसिलिटी बनाने के लिए ₹198.31 करोड़ का बड़ा EPC ऑर्डर मिला है, जो कि कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा सिविल कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट है।

इसके अलावा, अक्टूबर 2026 में कंपनी को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में टोल कलेक्शन के लिए ₹431.86 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं। इन नए ऑर्डर्स के साथ कंपनी की कुल ऑर्डर बुक ₹1,776.19 करोड़ के स्तर पर पहुंच गई है। अपनी ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए कंपनी प्रमोटर्स को कनवर्टिबल वारंट जारी कर ₹49.82 करोड़ जुटाने की तैयारी में है और साथ ही Indore Highway Real Estates Private Limited में 51% हिस्सेदारी भी खरीद रही है।

मुनाफे की चिंता और रिस्क फैक्टर

ऑर्डर मिलने की रफ्तार तेज है, लेकिन फाइनेंशियल मोर्चे पर चुनौती अभी भी बरकरार है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट गिरकर ₹1.06 करोड़ पर आ गया है, जबकि रेवेन्यू में बढ़ोतरी देखी गई थी। कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन काफी पतला यानी महज 1.59% के आसपास है।

सिविल कंस्ट्रक्शन में उतरना टोल बिजनेस से बिल्कुल अलग है, जहां लेबर, रॉ मटेरियल और टाइमलाइन मैनेजमेंट बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें जरा सी देरी या लागत बढ़ने से सीधे मुनाफे पर असर पड़ता है।

गवर्नेंस और पारदर्शिता पर नजर

निवेशकों के लिए एक चेतावनी का संकेत यह भी है कि रेटिंग एजेंसी CRISIL ने पहले कंपनी को 'Issuer Not Cooperating' के रूप में वर्गीकृत किया था। इसका मतलब है कि कंपनी की तरफ से जरूरी फाइनेंशियल जानकारियां समय पर नहीं मिल रही थीं, जो पारदर्शिता के लिहाज से चिंता का विषय हो सकता है। एक स्मॉल-कैप स्टॉक होने के नाते इसमें हाई वोलैटिलिटी (Volatility) बनी रह सकती है। आने वाले समय में कंपनी के क्वार्टरली नतीजे और प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस ही तय करेगी कि यह तेजी टिकाऊ है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.