Highway Infrastructure के लिए बड़ी खुशखबरी! इंदौर अथॉरिटी से ₹70 Cr का रोड प्रोजेक्ट पक्का, ऑर्डर बुक में जुड़ा मोटा मुनाफा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Highway Infrastructure के लिए बड़ी खुशखबरी! इंदौर अथॉरिटी से ₹70 Cr का रोड प्रोजेक्ट पक्का, ऑर्डर बुक में जुड़ा मोटा मुनाफा
Overview

Highway Infrastructure Limited ने इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA) के साथ **₹69.69 करोड़** का एक बड़ा रोड डेवलपमेंट कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। **30 महीनों** में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट कंपनी की **₹1,160 करोड़** से ज्यादा की ऑर्डर बुक में एक और बड़ा नाम जोड़ता है।

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प्रोजेक्ट की नई डील

Highway Infrastructure Limited (HIL) ने एक अहम ऐलान किया है। कंपनी ने इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA) के साथ ₹69.69 करोड़ (प्लस एप्लीकेबल जीएसटी) का एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। यह डील टाउन प्लानिंग स्कीम-08 के तहत एक रोड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए है, जो कुमेडी से लसुड़िया मोरी तक जाएगा। इस प्रोजेक्ट को 30 महीनों के अंदर पूरा किया जाएगा। गौरतलब है कि कंपनी को 15 जनवरी 2026 को इसका लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LOA) मिला था।

ऑर्डर बुक को मिला बूस्ट

यह नया कॉन्ट्रैक्ट Highway Infrastructure की मजबूत ऑर्डर बुक के लिए एक शानदार जुड़ाव है। जनवरी 2026 तक, कंपनी की कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक ₹1,160 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। यह ₹69.69 करोड़ का प्रोजेक्ट इस कुल ऑर्डर बुक का लगभग 6% जोड़ता है, जिससे अगले ढाई सालों के लिए कंपनी के रेवेन्यू की अच्छी विजिबिलिटी बनी रहेगी। कंपनी ने प्रोजेक्ट कंप्लीशन सुनिश्चित करने के लिए 5% (₹3.48 करोड़) की परफॉरमेंस सिक्योरिटी और अतिरिक्त 7.87% (₹6.68 करोड़) जमा की है। खास बात यह है कि इस कॉन्ट्रैक्ट में हितों का कोई टकराव (Conflict of Interest) नहीं है, क्योंकि यह किसी प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप कंपनी से संबंधित नहीं है।

जोखिम और आगे की राह

हालांकि, यह कॉन्ट्रैक्ट जीतना कंपनी के लिए सकारात्मक है, लेकिन Highway Infrastructure जिस सेक्टर में काम करती है, उसमें कुछ अंतर्निहित जोखिम (Inherent Risks) भी हैं। कंपनी का ईपीसी (EPC - Engineering, Procurement, Construction) बिजनेस, जो तेजी से बढ़ रहा है, काफी हद तक मध्य प्रदेश पर केंद्रित है। यह भौगोलिक एकाग्रता (Geographic Concentration) तब जोखिम भरी हो सकती है जब स्थानीय बाजार की स्थितियां प्रतिकूल हो जाएं। इसके अलावा, कंपनी के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा, खासकर ईपीसी सेगमेंट से, NHAI और IDA जैसे पब्लिक सेक्टर ग्राहकों से आता है। इससे वर्किंग कैपिटल साइकिल लंबा हो सकता है, यानी कंपनी को पेमेंट मिलने में देरी हो सकती है, जिसका असर कैश फ्लो पर पड़ सकता है। NHAI जैसी संस्थाओं द्वारा दिए जाने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स अक्सर एक साल की स्टैंडर्ड अवधि के लिए होते हैं, जिनमें विस्तार की गुंजाइश सीमित होती है। इसलिए, कंपनी को लगातार नए ऑर्डर हासिल करने के लिए प्रयास करना पड़ता है। इन चुनौतियों के बावजूद, Highway Infrastructure ने अपनी मजबूती दिखाई है। कंपनी ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों के लिए 121.5% की दमदार PAT ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी की रणनीति अपने मजबूत एग्जीक्यूशन ट्रैक रिकॉर्ड का लाभ उठाना और ऑर्डर बुक का विस्तार करना है, जिसका लक्ष्य FY27 तक ₹1,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है।

सेक्टर में मुकाबला

भारतीय रोड और हाईवे कंस्ट्रक्शन सेक्टर में कड़ा मुकाबला है, जिसमें Larsen & Toubro (L&T), Dilip Buildcon, Afcons Infrastructure और Reliance Infrastructure जैसे बड़े प्लेयर्स सक्रिय हैं। ये कंपनियां अक्सर समान सरकारी टेंडर्स के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। Highway Infrastructure की टोल कलेक्शन, ईपीसी और रियल एस्टेट में विविधता लाने की रणनीति इसे दूसरों से अलग करती है, लेकिन इसे अपनी बाजार हिस्सेदारी सुरक्षित करने के लिए अपनी दक्षता और वित्तीय मजबूती को लगातार साबित करना होगा। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Highway Infrastructure ने ₹328.8 करोड़ के काज़ा फी प्लाजा प्रोजेक्ट जैसे अन्य महत्वपूर्ण टोलिंग कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किए हैं, जो सेक्टर में इसकी बढ़ती गति को दर्शाते हैं। भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए कुल मिलाकर Outlook सकारात्मक बना हुआ है, जो सरकारी खर्च और राष्ट्रीय कनेक्टिविटी में सुधार पर फोकस से प्रेरित है। यह HIL जैसी कंपनियों के लिए एक अनुकूल माहौल प्रदान करता है। हालांकि, सेक्टर को प्रोजेक्ट की गुणवत्ता को लेकर भी जांच का सामना करना पड़ता है, जहाँ खराब काम के लिए ठेकेदारों पर जुर्माना लगाए जाने के मामले भी सामने आए हैं।

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