स्टील इंडस्ट्री के लिए एक नई उम्मीद जगी है। प्राइवेट स्टार्टअप Helix Carbon ने एक ऐसा इलेक्ट्रोलेसिस सिस्टम बनाया है जो ब्लास्ट फर्नेस से निकलने वाली गैसों को रीसायकल कर कोक (Coke) की खपत को कम करेगा। ध्यान रहे कि यह कंपनी अभी प्राइवेट है और शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है।
स्टील इंडस्ट्री में लागत कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की जद्दोजहद के बीच एक नए स्टार्टअप Helix Carbon ने बड़ा दावा किया है। कंपनी ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो ब्लास्ट फर्नेस से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को कैप्चर कर उसे कार्बन मोनोऑक्साइड में बदल देती है। इस गैस का इस्तेमाल फर्नेस में कोक के विकल्प के तौर पर किया जाता है।
कैसे बचेगी लागत?
स्टील बनाने की प्रक्रिया में कोक एक बड़ा खर्च होता है। Helix Carbon का दावा है कि उनकी इस तकनीक से कोक की खपत का 1/3 हिस्सा बचाया जा सकता है। इससे प्रति टन आयरन के उत्पादन पर करीब $14 की बचत हो सकती है, जो स्टील कंपनियों के मार्जिन को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
क्या निवेशक इसमें पैसा लगा सकते हैं?
रिटेल निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि Helix Carbon एक प्राइवेट स्टार्टअप है। इसका मतलब है कि यह कंपनी NSE या BSE जैसे किसी भी पब्लिक स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं करती है। इसके कोई पब्लिक फाइनेंशियल रिजल्ट्स या शेयर प्राइस डेटा उपलब्ध नहीं हैं। अभी यह तकनीक रिसर्च और पायलट स्टेज पर ही है।
चुनौती और भविष्य
स्टील सेक्टर में डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) की दिशा में यह एक अहम कदम है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर लागू करना अभी भी एक चुनौती है। स्टील फर्नेस जैसे हाई-टेंपरेचर वाले माहौल में इस तकनीक का लगातार और भरोसेमंद तरीके से काम करना इसकी सफलता की कुंजी है। भारत समेत दुनिया भर की बड़ी स्टील कंपनियां भी ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस जैसे विकल्पों पर काम कर रही हैं। यह तकनीक आने वाले समय में स्टील सेक्टर में नए पार्टनरशिप और निवेश के अवसरों के लिए एक अहम थीम साबित हो सकती है।
