Hazoor Multi Projects को National Highways Authority of India (NHAI) से ₹193.85 करोड़ का नया टोल कलेक्शन कॉन्ट्रैक्ट मिला है, लेकिन कंपनी के Q1 FY27 के नेट प्रॉफिट में आई **97.82%** की बड़ी गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
नया कॉन्ट्रैक्ट और प्रोजेक्ट की डीटेल्स
Hazoor Multi Projects Limited को 26 अगस्त 2026 को NHAI की ओर से 'लेटर ऑफ अवार्ड' मिला है। यह ₹193.85 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट तमिलनाडु के NH-45 पर स्थित 'परानूर फी प्लाजा' (Paranur Fee Plaza) के लिए है। एक साल की अवधि वाले इस एग्रीमेंट में न केवल टोल कलेक्शन, बल्कि टॉयलेट ब्लॉक्स का रखरखाव और जरूरी सामानों की आपूर्ति भी शामिल है।
क्यों दबाव में है शेयर?
अगस्त महीने में कंपनी ने कई टोल कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए हैं, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (जून 2026) में कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 97.82% लुढ़क गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि कंपनी को अपना बिजनेस स्केल करने के साथ-साथ प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने में काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।
सेक्टर का रिस्क और ऑपरेशनल चुनौतियां
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में टोल कलेक्शन का बिजनेस काफी कॉम्पिटिटिव है, जहाँ कंपनियां आक्रामक बिडिंग करती हैं, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर पड़ता है। इसके अलावा, Hazoor Multi Projects का पूरा मॉडल सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भर है, जिससे पॉलिसी में बदलाव या प्रशासनिक देरी जैसी अनिश्चितताओं का रिस्क बना रहता है।
इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स में काम शुरू करने के लिए काफी वर्किंग कैपिटल की जरूरत होती है, जो कंपनी की लिक्विडिटी पर दबाव डाल सकती है। कंपनी पर बढ़ते 'कंटिंजेंट लायबिलिटीज' (Contingent Liabilities) भी शेयरहोल्डर्स के लिए चिंता की बात हैं। फिलहाल, मार्केट इस बात को लेकर सतर्क है कि क्या कंपनी अपनी रेवेन्यू ग्रोथ को स्टेबल प्रॉफिट में बदल पाएगी या नहीं।
