सबसिडियरी को मिली रेटिंग, Tata Steel से बड़ा ऑर्डर
Hazoor Multi Projects (HMPL) में आज दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। कंपनी की सबसिडियरी, Hazoor Infra Projects Limited (HIPPL), को CRISIL ने ₹476 करोड़ की बैंक फैसिलिटीज के लिए लॉन्ग-टर्म 'CRISIL BBB+/Stable' और शॉर्ट-टर्म 'CRISIL A2' की रेटिंग दी है। ये रेटिंग HIPPL के महाराष्ट्र में NH-66 के हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) प्रोजेक्ट के लिए हैं।
प्रोजेक्ट की स्थिति और फायदे
इस प्रोजेक्ट के 77% हिस्से के लिए प्रोविजनल कमर्शियल ऑपरेशन डेट (PCOD) 30 मार्च 2025 को ही मिल गई थी, और पहला एन्युटी अक्टूबर 2025 में प्राप्त हुआ। इस स्ट्रक्चर में इन्फ्लेशन इंडेक्सेशन और एन्युटी पर इंटरेस्ट जैसे फायदे शामिल हैं, जिससे हेल्दी डेट प्रोटेक्शन मेट्रिक्स का अनुमान है। प्रोजेक्ट के 1.10-1.20 गुना के बीच औसत डेट सर्विस कवरेज रेशियो (DSCR) की उम्मीद है।
Tata Steel से मिला ₹182.95 करोड़ का ऑर्डर
वहीं, HMPL ने Tata Steel Limited के साथ ₹182.95 करोड़ का एक डोमेस्टिक वर्क ऑर्डर साइन किया है। यह ऑर्डर रेजिडेंशियल कॉलोनीज़ के टर्नकी डेवलपमेंट से जुड़ा है, जिसमें G+9 अपार्टमेंट स्ट्रक्चर्स का निर्माण शामिल है। 24 महीने की इस डील से कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिलेगी और यह इंफ्रास्ट्रक्चर, सिविल EPC, शिपयार्ड सर्विसेज के साथ-साथ ऑयल और गैस सेक्टर में भी कंपनी के डाइवर्सिफिकेशन को बढ़ावा देगी।
मिले-जुले फाइनेंशियल रिजल्ट्स
इन सकारात्मक डेवलपमेंट के बावजूद, कंपनी के फाइनेंशियल रिजल्ट्स मिले-जुले रहे हैं। Q3 FY26 में, स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹7,597 लाख रहा, जो पिछले साल के ₹5,676 लाख से ज्यादा है। हालांकि, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹313.74 लाख से गिरकर ₹271.66 लाख हो गया। दूसरी ओर, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट टैक्स क्रेडिट के चलते ₹271.43 लाख से उछलकर ₹645.84 लाख पर पहुंच गया, भले ही कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹13,903.87 लाख रहा।
वैल्यूएशन और ऐतिहासिक प्रदर्शन
कंपनी के स्टॉक का परफॉरमेंस ऐतिहासिक रूप से शानदार रहा है, जिसने पिछले पांच सालों में 9,750% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। लेकिन, वर्तमान में इसकी वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 30.99 से 56.91 के बीच है, जो इंडस्ट्री के मुकाबले काफी अधिक है। प्राइस-टू-बुक (P/B) रेशियो लगभग 1.49-1.63 के आसपास है।
विश्लेषकों की चिंताएं
विश्लेषकों की मानें तो, कंपनी ऑपरेशन से निगेटिव कैश फ्लो, बढ़ते इंटरेस्ट एक्सपेंस और Q3 FY26 में निगेटिव इंटरेस्ट कवरेज रेशियो जैसी चिंताओं का सामना कर रही है। डेट-टू-इक्विटी रेशियो में वृद्धि (कुछ रिपोर्टों में 0.73 तक) कर्ज पर निर्भरता बढ़ने का संकेत देती है। इसके अलावा, CEO के वेतन में वृद्धि के बावजूद आय में गिरावट और मैनेजमेंट टीम के कम बोर्ड टेन्योर (औसतन 1.8 साल) भी जांच के दायरे में हैं।
भविष्य की राह
भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर सरकारी पहलों के कारण तेजी से बढ़ रहा है, जो HMPL जैसी कंपनियों के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करता है। हालांकि, कंपनी के लिए यह ज़रूरी होगा कि वह लगातार प्रॉफिटेबिलिटी साबित करे, अपने बढ़ते इंटरेस्ट के बोझ को संभाले और अपने मौजूदा वैल्यूएशन को जायज ठहराए। NH-66 अपग्रेड और Tata Steel प्रोजेक्ट्स का सफल निष्पादन ही भविष्य के प्रदर्शन के महत्वपूर्ण संकेतकों के रूप में देखे जाएंगे।