Haveus Aerotech का ₹450 करोड़ का बड़ा दांव! कर्नाटक में बनेगा ATR एयरक्राफ्ट का मॉडर्न MRO हब

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Haveus Aerotech का ₹450 करोड़ का बड़ा दांव! कर्नाटक में बनेगा ATR एयरक्राफ्ट का मॉडर्न MRO हब
Overview

Haveus Aerotech **₹450 करोड़** का भारी निवेश कर रही है। कंपनी कर्नाटक में ATR एयरक्राफ्ट के लिए एक खास MRO (Maintenance, Repair, and Overhaul) फैसिलिटी स्थापित करने जा रही है। यह भारत की घरेलू एविएशन मेंटेनेंस क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

बड़ा एग्रीमेंट, बड़ा निवेश!

Haveus Aerotech ने कर्नाटक सरकार के साथ एक अहम डील साइन की है। इसके तहत कंपनी ₹450 करोड़ का आधुनिक MRO (Maintenance, Repair, and Overhaul) हब बनाएगी, जो खास तौर पर ATR एयरक्राफ्ट के लिए होगा। यह 5 साल में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट है और इसका मुख्य लक्ष्य भारत को ग्लोबल MRO हब के तौर पर स्थापित करना है। इस फैसिलिटी में ATR एयरक्राफ्ट के ज़रूरी पुर्जों जैसे रेडोम, नैकेल, लैंडिंग गियर और APU (Auxiliary Power Units) की मरम्मत पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस पहल से करीब 100 नई नौकरियां भी पैदा होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

क्यों है यह पहल अहम?

भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से फल-फूल रहा है। फ्लीट का आकार और यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में, देश के भीतर ही एक मजबूत MRO (Maintenance, Repair, and Overhaul) इंफ्रास्ट्रक्चर की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। भारत का MRO मार्केट फिलहाल लगभग $2.0 बिलियन का है, लेकिन अनुमान है कि 2034 तक यह ₹7.0 बिलियन तक पहुंच सकता है। मौजूदा समय में, इस काम का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में होता है, जिसमें एयरलाइंस का कीमती विदेशी पैसा खर्च हो जाता है। सरकार की 'मेक इन इंडिया' स्कीम, GST दरों में 18% से घटाकर 5% करना और 100% फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) की अनुमति जैसी पहलों ने Haveus Aerotech जैसी कंपनियों के लिए एक बहुत ही अनुकूल माहौल बनाया है। कर्नाटक की अपनी एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी भी इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने और एक मजबूत औद्योगिक आधार बनाने पर केंद्रित है।

Haveus Aerotech का ट्रैक रिकॉर्ड

Haveus Aerotech, जो Satyasai Group का हिस्सा है, 2014 से एविएशन सेक्टर में सक्रिय है। कंपनी को US DOT, भारत के DGCA और EASA से MRO सेवाओं के लिए आवश्यक अप्रूवल प्राप्त हैं। 31 मार्च 2024 तक, कंपनी की नेट वर्थ ₹21.80 करोड़ दर्ज की गई थी। फाइनेंशियल ईयर 2024 में कंपनी का कुल ऑपरेटिंग इनकम पिछले साल के मुकाबले प्रभावशाली 120.86% बढ़कर ₹45.23 करोड़ पर पहुंच गया। EBITDA में भी सुधार देखने को मिला है, जो कंपनी को बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए तैयार करता है। भारत में बड़ी संख्या में ATR एयरक्राफ्ट के परिचालन को देखते हुए, इस सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करना एक स्ट्रैटेजिक कदम माना जा रहा है, खासकर सरकार द्वारा रीजनल कनेक्टिविटी (UDAN) को बढ़ावा देने की योजनाओं के बीच।

कॉम्पिटिशन और चुनौतियाँ

हालांकि, भारतीय MRO सेक्टर में कॉम्पिटिशन कड़ा है। Air India Engineering Services Limited (AIESL), Air Works, और GMR Aero Technic जैसे प्रमुख घरेलू खिलाड़ी मौजूद हैं। Adani Group भी MRO कंपनियों का अधिग्रहण करके इस क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत कर रहा है। वहीं, Lufthansa Technik और ST Engineering जैसे ग्लोबल दिग्गज भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। Haveus Aerotech को अपनी DGCA और EASA सर्टिफिकेशन का पूरा फायदा उठाना होगा और साथ ही ऑपरेशनल एफिशिएंसी को लगातार बेहतर बनाना होगा। इंडस्ट्री में स्किल्ड एविएशन मेंटेनेंस प्रोफेशनल्स की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाएं और सप्लाई चेन में रुकावटें जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.