'वन-टाइम गेन' ने कैसे संभाला Q4 प्रॉफिट?
Havells India के चौथी तिमाही (FY26) के नतीजे मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। कंपनी ने जहां नेट प्रॉफिट में 40.6% की जोरदार उछाल दिखाते हुए ₹734 करोड़ का आंकड़ा पेश किया, वहीं यह बढ़त मुख्य रूप से ₹283 करोड़ के 'अन्य आय' (other income) के कारण संभव हुई। कंपनी के कोर ऑपरेशंस यानी ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई (EBITDA) में 4.4% की गिरावट आई और यह ₹728 करोड़ पर आ गई। वहीं, EBITDA मार्जिन्स भी पिछले साल के 11.7% से घटकर 10.8% रह गए।
मार्जिन दबाव और स्टॉक में गिरावट
इन नतीजों के बाद 23 अप्रैल, 2026 को Havells India का शेयर करीब 6% तक गिर गया। एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी की ऑपरेशनल परफॉर्मेंस उम्मीदों के मुताबिक रिकवर नहीं हो पाई है। ICICI Securities की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के तांबे और एल्यूमीनियम की कीमतों में गिरावट का फायदा उठाकर और कीमतों में वृद्धि को आगे बढ़ाने के प्रयास Q4 FY26 में उम्मीद से कमजोर दिखे। मजबूत प्रतिस्पर्धा और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह दबाव बना हुआ है। कंपनी का FY27 में मिड-टीन्स रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य, जो कि दशक के निचले स्तरों से एफिशिएंसी और मार्जिन सुधारने के लिए था, अब Q4 के ऑपरेशनल नतीजों के चलते मुश्किल में दिख रहा है।
वैल्यूएशन और सेक्टर की स्थिति
Havells India का शेयर फिलहाल 52.1x से 56.81x के प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो पर ट्रेड कर रहा है (पिछले बारह महीनों के आधार पर)। ICICI Securities के मुताबिक, यह अपने ऐतिहासिक औसत P/E से थोड़ा कम है, लेकिन कुछ प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में अभी भी प्रीमियम पर है। वहीं, Crompton Greaves Consumer Electricals जैसे प्रतिद्वंद्वी लगभग 30x-35x P/E पर, Polycab India करीब 40x-55x पर और Bajaj Electricals 100x से भी ऊपर के P/E पर कारोबार कर रहे हैं। भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर फिलहाल धीमी मांग और इनपुट लागतों में वृद्धि के कारण मार्जिन दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
एनालिस्ट्स की चिंताएं बढ़ीं
हालिया एनालिस्ट रिपोर्ट्स कंपनी के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं दिखा रही हैं। Morgan Stanley ने खराब कमाई की विजिबिलिटी, आर्थिक दबावों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का हवाला देते हुए Havells को 'Underweight' रेटिंग दी और टारगेट प्राइस घटाकर ₹1,171 कर दिया। फर्म ने Lloyd और केबल्स एंड वायर्स (C&W) सेगमेंट में कमजोर प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला, जिससे अनुमान है कि मार्केट शेयर हासिल करने की कोशिशें मार्जिन को और प्रभावित कर सकती हैं। Lloyd को लगातार चौथी तिमाही में EBIT लॉस हुआ है। Jefferies ने 'Hold' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस घटाया, जबकि Citi ने भी टारगेट प्राइस कम किया और 'Neutral' रेटिंग दी है, यह चेतावनी देते हुए कि C&W सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा मार्जिन पर दबाव बनाए रखेगी।
भविष्य के लिए मिश्रित संकेत
Havells India के शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म आउटलुक पर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। ICICI Securities और Goldman Sachs जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने आय अनुमानों को कम करने के बावजूद 'Buy' रेटिंग और ₹1,600 के आसपास के टारगेट प्राइस दिए हैं। दूसरी ओर, Morgan Stanley की 'Underweight' रेटिंग और ₹1,171 का टारगेट प्राइस गंभीर चिंताएं दर्शाता है। Jefferies 'Hold' और Citi 'Neutral' रेटिंग के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। शेयर में सुधार के लिए ऑपरेशनल मार्जिन ग्रोथ, कूलिंग प्रोडक्ट्स की मांग में रिकवरी और कंपनी की प्रतिस्पर्धा व कमोडिटी कीमतों को मैनेज करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। Motilal Oswal का अनुमान है कि FY28 तक ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन FY26 के 9.8% से बढ़कर 10.6% हो सकता है।
