सरकारी हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HUDCO) ने 7 जनवरी 2026 को घोषणा की कि उसने छत्तीसगढ़ सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य अगले पांच वर्षों, यानी वित्त वर्ष 2030 तक, राज्य में विभिन्न परियोजनाओं के लिए ₹1 लाख करोड़ तक का ऋण वित्तपोषण उपलब्ध कराना है। यह गैर-बाध्यकारी समझौता नवा रायपुर में निष्पादित किया गया।
Funding Details and Allocations:
MoU की शर्तों के तहत, छत्तीसगढ़ सरकार के नियंत्रण वाली एजेंसियां कुल ₹1 लाख करोड़ की वित्तीय सहायता लेने का इरादा रखती हैं। यह प्रति वर्ष लगभग ₹20,000 करोड़ के बराबर है। क्षेत्र-वार अनुमानित आवंटन पर्याप्त है: आवास परियोजनाओं के लिए ₹10,000 करोड़, और कोर व नॉन-कोर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹70,000 करोड़। इसमें जल आपूर्ति, सीवरेज, जल निकासी, सड़कें, बिजली, स्मार्ट सिटी, मेट्रो परियोजनाएं, हवाई अड्डे, औद्योगिक पार्क, सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, लॉजिस्टिक्स हब, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, नागरिक उड्डयन, खनन संस्थान और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बिजली परियोजनाओं और नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के लिए ₹10,000-₹10,000 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।
Non-Binding Framework:
HUDCO ने इस बात पर जोर दिया है कि MoU एक सैद्धांतिक व्यवस्था है और यह किसी भी पक्ष पर बाध्यकारी दायित्व नहीं डालता है। HUDCO अपनी प्रचलित ऋण नीतियों, कठोर उचित परिश्रम (due diligence), पर्याप्त ऋण सुरक्षा और व्यक्तिगत परियोजना मंजूरी के आधार पर टर्म लोन पर विचार करेगा। प्रत्येक ऋण के लिए विशिष्ट नियम और शर्तें HUDCO और उधार लेने वाली राज्य एजेंसियों के बीच प्रत्येक मामले के आधार पर तय की जाएंगी। छत्तीसगढ़ सरकार सीधे ऋण चुकौती के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, हालांकि वह अपनी नीतियों के अनुसार सरकारी गारंटी जारी कर सकती है। यदि बेहतर शर्तें उपलब्ध हों तो राज्य एजेंसियां वैकल्पिक ऋणदाताओं से धन सुरक्षित करने के लिए स्वतंत्र हैं।
MoU को आपसी विस्तार के बिना वित्त वर्ष 2030 तक वैध माना जाएगा। कोई भी पक्ष 30-दिवसीय नोटिस देकर समझौते को समाप्त कर सकता है। किसी भी विवाद को आपसी चर्चाओं या सीपीएसई विवाद समाधान के लिए प्रशासनिक तंत्र (Administrative Mechanism for Resolution of CPSEs Disputes) के माध्यम से हल किया जाएगा।