HRS Aluglaze Limited ने ऐलान किया है कि उन्हें कई डोमेस्टिक ऑर्डर मिले हैं, जिनकी कुल वैल्यू ₹26.94 करोड़ (GST छोड़कर) है। इन कॉन्ट्रैक्ट्स में एल्यूमीनियम विंडो, फसाड और क्लैडिंग का काम शामिल है, जिसे अगले 3 से 12 महीनों में पूरा किया जाना है। सबसे बड़ा ऑर्डर ₹10.19 करोड़ का Safal Goyal Realty LLP से विंडो और रेलिंग सिस्टम के लिए मिला है, जिसकी ड्यू डेट 30 सितंबर 2026 है। KEC International Limited ने ₹7.23 करोड़ का एल्यूमीनियम कम्पोजिट क्लैडिंग शीट के लिए ऑर्डर दिया है, और Aaryan Build Projects LLP से विंडो से जुड़े काम के लिए ₹6.59 करोड़ का ऑर्डर मिला है। ये सभी कॉन्ट्रैक्ट्स भी सितंबर 2026 तक पूरे होने हैं। इसके अलावा Pinnacle Solutions, PSP Projects Limited, PSP Projects & Proactive Construction Pvt Ltd, और Shiv Infrastructure जैसी कंपनियों से भी छोटे ऑर्डर मिले हैं।
इस घोषणा के बाद, HRS Aluglaze के शेयर 4.99% की उछाल के साथ ₹264.05 पर पहुंच गए और लगातार दूसरे दिन 5% का अपर सर्किट (Upper Circuit) लगा दिया। पिछले तीन सत्रों में शेयर की कीमत ₹216 से बढ़कर ₹264 हो गई है, जो करीब 21% की तेज बढ़त है। यह रैली ऐसे समय में आई है जब broader Indian market दबाव में था, जहां Nifty 50 में 1.15% की गिरावट दर्ज की गई थी।
हालांकि, शेयर की इस तूफानी तेजी के बावजूद, कंपनी की वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। HRS Aluglaze का पिछले 12 महीनों का P/E ratio 85.5x से 98.9x के बीच है। यह वैल्यूएशन इंडियन बिल्डिंग इंडस्ट्री के औसत 22.4x और इसके पीयर्स जैसे Rushil Décor (11.0x) और Innovators Façade Systems (17.7x) की तुलना में काफी ज्यादा है।
भारत के कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर में मजबूत ग्रोथ देखी जा रही है। लेकिन HRS Aluglaze के शेयर पिछले एक साल में ₹126.00 और ₹292.60 के दायरे में ही रहे हैं। पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का रेवेन्यू 57.77% बढ़ा है, लेकिन पिछले तीन सालों में प्रॉफिट ग्रोथ में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, यह स्थिर बनी हुई है। सेल्स में भी लंबी अवधि में महत्वपूर्ण ग्रोथ नहीं दिखी है। ₹509 करोड़ की मार्केट कैप की तुलना में FY25 का अनुमानित रेवेन्यू ₹42.11 करोड़ है, जो प्राइस-टू-सेल्स रेश्यो को बहुत अधिक दर्शाता है।
शेयर की हाई वैल्यूएशन और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में बड़े अंतर के चलते निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। कुछ एनालिस्ट 12 महीनों के भीतर शेयर के लिए ₹462.97 का टारगेट दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई एनालिस्ट 'Strong Sell' रेटिंग दे रहे हैं। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 1.92 है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का डेट ऑपरेटिंग कैश फ्लो से अच्छी तरह कवर नहीं होता है और EV/EBITDA 44.55 है। हालिया रेवेन्यू बढ़ोतरी के बावजूद, पिछले तीन सालों में प्रॉफिट ग्रोथ की कमी एक बड़ी चिंता का विषय है, खासकर मौजूदा हाई P/E ratio के साथ। पिछले पांच सालों में ऑपरेशनल एफिशिएंसी, यानी EBITDA मार्जिन, बेहद कम 0% बताई गई है।
यह स्टॉक में तेज उछाल अल्पावधि के ट्रेडर्स के लिए भले ही फायदेमंद हो, लेकिन यह फंडामेंटल अर्निंग्स ग्रोथ से अलग दिख रहा है। इससे ओवरवैल्यूएशन की चिंताएं बढ़ जाती हैं और यदि ग्रोथ उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही तो शेयर में तेज गिरावट का जोखिम भी है। निवेशकों को सलाह है कि वे नए ऑर्डर्स की सकारात्मकता को कंपनी के हाई P/E ratio, पिछली प्रॉफिट ग्रोथ की दिक्कतों और वित्तीय जोखिमों के साथ संतुलित करके ही निवेश का निर्णय लें।