H.G. Infra Engineering Limited ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी के प्रदर्शन में जहां एक ओर रेवेन्यू में वृद्धि दिखी, वहीं दूसरी ओर लाभप्रदता (Profitability) पर दबाव साफ नजर आया। इसके साथ ही, कंपनी के बढ़ते कर्ज़ और एक चल रही CBI जांच ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
📉 स्टैंडअलोन प्रदर्शन पर एक नज़र
कंपनी के स्टैंडअलोन प्रदर्शन की बात करें तो, Q3 FY26 में परिचालन से रेवेन्यू साल-दर-साल (YoY) 3.90% घटकर ₹14,497.67 करोड़ रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹15,085.38 करोड़ था। लाभ (Profit After Tax - PAT) में 29.08% की बड़ी गिरावट देखी गई और यह ₹968.62 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल ₹1,365.64 करोड़ था। प्रति शेयर आय (EPS) भी 29.07% गिरकर ₹14.86 हो गई। ऑपरेटिंग मार्जिन घटकर 15.47% रह गया, जबकि नेट प्रॉफिट मार्जिन 6.68% पर सिमट गया।
नौ महीनों (9M FY26) के लिए, स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 5.73% की वृद्धि होकर ₹43,127.57 करोड़ दर्ज किया गया। हालांकि, PAT में 20.59% की कमी आई और यह ₹2,896.37 करोड़ पर पहुंच गया।
📈 कंसोलिडेटेड नतीजे
अब कंसोलिडेटेड स्तर पर नजर डालें तो, Q3 FY26 में रेवेन्यू 12.36% बढ़कर ₹14,211.60 करोड़ हुआ। लेकिन, इस टॉप-लाइन ग्रोथ के बावजूद, कंसोलिडेटेड PAT 18.27% घटकर ₹940.83 करोड़ रह गया। कंसोलिडेटेड EPS में 18.23% की गिरावट आई और यह ₹14.44 हो गया। ऑपरेटिंग मार्जिन 21.73% रहा, जबकि नेट प्रॉफिट मार्जिन घटकर 6.62% पर आ गया।
नौ महीनों (9M FY26) में, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 3.05% बढ़कर ₹38,078.65 करोड़ हुआ। लेकिन, कंसोलिडेटेड PAT में 31.03% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो ₹2,451.83 करोड़ रहा, और EPS 31.59% गिरकर ₹37.62 हो गया।
🚩 खतरे की घंटी: कर्ज़ का बढ़ता बोझ और CBI जांच का साया
कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य के संकेतक चिंताजनक हैं। कंसोलिडेटेड डेट-इक्विटी रेशियो (Debt-Equity Ratio) पिछले साल के 1.39 से बढ़कर 1.89 हो गया है, जो कंपनी पर बढ़ते कर्ज़ का साफ संकेत है। इससे भी गंभीर बात यह है कि डेट सर्विस कवरेज रेशियो (DSCR) गिरकर 0.93 पर आ गया है, जो 1 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे है। इसका मतलब है कि कंपनी को अपने लोन की किश्तें चुकाने में मुश्किल हो सकती है।
इन सबके बीच, कंपनी के चार कर्मचारियों को लेकर एक CBI जांच भी चल रही है, जिसके चलते कुछ ऑफिसों में तलाशी भी ली गई है। कंपनी का कहना है कि इसका तत्काल कोई वित्तीय या परिचालन पर असर नहीं है, लेकिन ऐसी जांचें कंपनी की साख और कामकाज पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
कंपनी के बोर्ड ने पांच पूरी तरह से अपनी सहायक कंपनियों (wholly-owned subsidiaries) में 100% हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है, हालांकि यह प्रोजेक्ट के पूरा होने जैसी शर्तों पर निर्भर है। यह कदम कंपनी के कर्ज़ को कम करने या कामकाज को सुव्यवस्थित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
निवेशक आने वाली तिमाहियों में यह देखेंगे कि कंपनी अपने बढ़ते कर्ज़ का प्रबंधन कैसे करती है, CBI जांच से कैसे निपटती है, और अपनी बिक्री की रणनीति को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाती है।