ऑर्डर बुक में जुड़ा बड़ा ऑर्डर, रेवेन्यू की विजिबिलिटी बढ़ी
HTL लिमिटेड ने डोमेस्टिक टियर-1 कस्टमर से ऑप्टिकल फाइबर केबल के लिए ₹1,366 करोड़ का यह महत्वपूर्ण ऑर्डर हासिल किया है। दिसंबर 2026 तक चलने वाली इस डिलीवरी से HFCL भारत के तेजी से बढ़ते टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी अहम भूमिका को और मजबूत करेगा। हालांकि, बाजार की कड़ी प्रतिस्पर्धा और कंपनी के हाई वैल्यूएशन के बीच इस सौदे पर गहराई से नजर रखने की जरूरत है।
HFCL की ऑर्डर बुक हुई ₹21,000 करोड़ के पार
HTL लिमिटेड का ₹1,366 करोड़ का ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) ऑर्डर, HFCL की कुल ऑर्डर बुक में एक महत्वपूर्ण इजाफा है। अब कंपनी की ऑर्डर बुक ₹11,125 करोड़ से बढ़कर ₹21,000 करोड़ के पार पहुंच गई है। हाल ही में मिले ₹10,159 करोड़ के ग्लोबल सप्लाई एग्रीमेंट ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है। इस खबर के बाद बुधवार सुबह स्टॉक में करीब 3.58% की तेजी देखी गई और यह ₹75.24 पर कारोबार कर रहा था। इस लंबे डिलीवरी शेड्यूल से कंपनी के लिए अनुमानित रेवेन्यू स्ट्रीम सुनिश्चित होती है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए बेहद जरूरी है।
'डिजिटल इंडिया' और HFCL की रणनीति
भारत में ऑप्टिकल फाइबर केबल मार्केट में 2031 तक जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है। 'डिजिटल इंडिया', 'भारतनेट' और 5G नेटवर्क जैसे सरकारी पहलों के साथ-साथ प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसी पॉलिसियां घरेलू उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को बढ़ावा दे रही हैं, जिसका सीधा फायदा HFCL जैसी कंपनियों को मिल रहा है।
HFCL ने लगभग ₹580 करोड़ का निवेश करके प्रीफॉर्म मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित की है। यह बैकवर्ड इंटीग्रेशन की दिशा में एक बड़ा स्ट्रैटेजिक कदम है। इसका मकसद कच्चे माल की सप्लाई पर बेहतर कंट्रोल हासिल करना, लागत कम करना और बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स पर मार्जिन सुरक्षित करना है। यह कदम कंपनी को Sterlite Technologies और Birla Cable जैसे प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला करने में मदद करेगा।
वैल्यूएशन की चिंताएं सबसे बड़ी
बावजूद इसके, HFCL का करंट वैल्यूएशन चिंता का विषय बना हुआ है। अप्रैल 2026 तक, कंपनी का P/E रेश्यो लगभग 214.64 है, जो इसके 10 साल के औसत 24.15 और इंडस्ट्री एवरेज करीब 38 से कहीं ज्यादा है। वहीं, इसके प्रतिस्पर्धी Birla Cable का P/E रेश्यो 45 से 108 के बीच है। Sterlite Technologies का P/E रेश्यो भी काफी अस्थिर रहा है। इतना हाई वैल्यूएशन यह दर्शाता है कि निवेशक कंपनी से भविष्य में बहुत बड़ी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं।
जोखिम और सावधानियां
हाल के ऑर्डर्स और निवेश के बावजूद, कुछ फैक्टर्स पर सावधानी बरतना जरूरी है। HFCL का 200x से ऊपर का P/E रेश्यो बताता है कि यह स्टॉक अपनी कमाई और प्रतिस्पर्धियों की तुलना में महंगा हो सकता है। पिछले एक साल में, HFCL के शेयर में करीब 16.57% की गिरावट आई है, भले ही हाल ही में बड़े ऑर्डर मिले हों। फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी के सेल्स और प्रॉफिट में गिरावट देखी गई, जिसमें नेट प्रॉफिट ₹336.59 करोड़ से घटकर ₹172.90 करोड़ रह गया।
₹1,366 करोड़ के ऑर्डर को संभालने वाली सहायक कंपनी HTL लिमिटेड को लेकर भी चिंताएं हैं। पिछले दो सालों में HTL का प्रदर्शन गिरा है, जिसमें आय में कमी और मार्जिन में सिकुड़न देखी गई है, जिसका कारण मांग कमजोर होना है। यह सब्सिडियरी अपनी फाइनेंसिंग के लिए HFCL की गारंटी पर बहुत ज्यादा निर्भर है। इस बड़े ऑर्डर की लंबी एग्जीक्यूशन टाइमलाइन परफॉर्मेंस और मार्जिन पर दबाव का जोखिम पैदा करती है, खासकर अगर कच्चे माल की लागत बढ़ती है या बाजार की मांग बदलती है।
एनालिस्ट्स का आउटलुक
एनालिस्ट्स ज्यादातर सकारात्मक बने हुए हैं। कंसेंसस रिकमेन्डेशन HFCL को 'Buy' करने की है और प्राइस टारगेट औसतन ₹132-146 के आसपास है। यह मौजूदा स्तरों से 80% से ज़्यादा की ग्रोथ की संभावना को दर्शाता है। यह भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और कंपनी की बढ़ती ऑर्डर बुक से प्रेरित भविष्य की ग्रोथ में विश्वास दिखाता है। मैनेजमेंट का स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट और बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने पर फोकस HFCL को भविष्य की डिमांड का फायदा उठाने में मदद करेगा।