HD Hyundai के अधिकारी $4 अरब के एक विशाल शिपयार्ड प्रोजेक्ट को लेकर तमिलनाडु सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, आंध्र प्रदेश द्वारा काकीनाडा में इसे स्थापित करने की दावेदारी ने प्रोजेक्ट की जगह को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
HD Hyundai के प्रतिनिधियों ने इस हफ्ते तमिलनाडु के अधिकारियों के साथ मुलाकात की है, जो उनके प्रस्तावित $4 अरब के मेगा-शिपयार्ड प्रोजेक्ट के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। हालांकि तमिलनाडु ने दिसंबर 2025 में एमओयू (MoU) और अप्रैल 2026 में त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन आंध्र प्रदेश द्वारा काकीनाडा की पैरवी के कारण मामला पेचीदा हो गया है।
लोकेशन को लेकर घमासान
आंध्र प्रदेश सरकार अपने यहां पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर और 'प्लग-एंड-प्ले' सुविधाओं को भुनाने की कोशिश कर रही है। दक्षिण कोरियाई दिग्गज कंपनी फिलहाल अपनी लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक फायदों को ध्यान में रखते हुए विकल्पों को तौल रही है। सितंबर 2026 की शुरुआत में कंपनी ने तमिलनाडु के थूथुकुडी में साइट का निरीक्षण भी किया था।
भारत के लिए अहम प्रोजेक्ट
यह शिपयार्ड भारत की समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति का एक मुख्य हिस्सा है, जिसका लक्ष्य तटों पर 5 बड़े ग्रीनफील्ड क्लस्टर विकसित करना है। इसके सफल होने पर आधुनिक शिपबिल्डिंग टेक्नोलॉजी और भारी विदेशी निवेश भारत आएगा।
रिस्क फैक्टर्स और बाजार पर असर
इस प्रतिस्पर्धा के कारण जमीन आवंटन और जरूरी परमिट मिलने में देरी हो सकती है, जो प्रोजेक्ट की टाइमलाइन को प्रभावित कर सकता है। कंपनी ने कोचीन शिपयार्ड के साथ अपना जॉइंट वेंचर खत्म कर दिया है, जिससे साफ है कि उनका पूरा ध्यान इस नए प्रोजेक्ट पर है।
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह HD Hyundai (शिपबिल्डिंग) है, न कि Hyundai Motor India (ऑटोमोटिव)। फिलहाल बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी आखिरकार किस राज्य को चुनती है और प्रोजेक्ट की डेडलाइन क्या तय होती है।
