वॉल्यूम में उछाल, पर मार्जिन पर गहरा दबाव
Greenpanel Industries ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही में मीडियम डेंसिटी फाइबरबोर्ड (MDF) वॉल्यूम में साल-दर-साल 27.8% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ 130,000 क्यूबिक मीटर का आंकड़ा छुआ। कंपनी की घरेलू बिक्री 29.5% बढ़ी, जो मजबूत डिमांड को दर्शाती है।
लेकिन, इस ग्रोथ पर बड़ा ग्रहण लग गया। केमिकल कीमतों में 40-45% की भारी बढ़ोतरी और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनावों के कारण बढ़ी हुई फ्रेट कॉस्ट ने कंपनी के मार्जिन को 9.2% तक सिकोड़ दिया। कच्चे माल की लागत का करीब 40% हिस्सा केमिकल पर निर्भर करता है। इन बढ़ती लागतों को मैनेज करने के लिए कंपनी ने करीब 15% की मूल्य वृद्धि भी की।
लागतों का बढ़ता बोझ और वित्तीय नतीजे
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाया है, जिसका सीधा असर फ्रेट चार्ज और नैफ्था व एथिलीन जैसे अहम केमिकल पर पड़ रहा है। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत दोगुनी हो गई है और शिपिंग रूट बदलने से ट्रांजिट टाइम 30 दिन तक बढ़ गया है, साथ ही वॉर-रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम भी चढ़ गया है।
इन सब वजहों से, फाइनेंशियल ईयर 2026 में Greenpanel Industries को ₹29.13 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल FY25 में ₹72.11 करोड़ का नेट प्रॉफिट था। वहीं, चौथी तिमाही (Q4 FY26) में नेट प्रॉफिट घटकर महज़ ₹1.37 करोड़ रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹29.39 करोड़ की तुलना में एक बड़ा落差 (गिरावट) है।
एनालिस्ट की राय और आगे की राह
इन चुनौतियों के बावजूद, एनालिस्ट्स Greenpanel Industries को लेकर सतर्कता के साथ आशावादी बने हुए हैं। ज़्यादातर एनालिस्ट्स ने 'BUY' रेटिंग बरकरार रखी है। Prabhudas Lilladher ने अपने टारगेट प्राइस को ₹370 से घटाकर ₹332 कर दिया है। फिलहाल, 16 एनालिस्ट्स का औसत टारगेट प्राइस ₹292.50 है, जो मौजूदा भाव से 44% से ज्यादा की संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है।
माना जा रहा है कि FY26-28E के दौरान कंपनी के रेवेन्यू में 15.2% और PAT में 219.6% की तगड़ी ग्रोथ देखने को मिल सकती है। भारतीय एमडीएफ (MDF) मार्केट के भी 2026 तक ₹6000 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। ऐसे में, यह देखना अहम होगा कि कंपनी लागतों को कंट्रोल करते हुए वॉल्यूम ग्रोथ को मुनाफे में कैसे बदल पाती है।