Greaves Cotton ने तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में अपने नतीजों से बाजार को प्रभावित किया है। कंपनी ने 22.6% की जोरदार उछाल के साथ ₹25.5 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह दमदार परफॉर्मेंस 16.6% बढ़कर ₹875.5 करोड़ के रेवेन्यू पर हासिल हुई है।
इस तिमाही की सबसे बड़ी हाइलाइट EBITDA में आई 56.3% की शानदार तेजी है, जो बढ़कर ₹61.8 करोड़ पर पहुंच गया। इसके चलते कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन में जबरदस्त सुधार हुआ है, जो पिछले साल की समान अवधि के 5.3% से बढ़कर 7% हो गया है। यह कंपनी की लागत दक्षता (cost efficiency) और बेहतर ऑपरेटिंग लेवरेज का सीधा असर है, जिससे प्रति यूनिट बिक्री पर मुनाफा बढ़ा है।
कंपनी का बिजनेस क्लीन मोबिलिटी, फार्म इक्विपमेंट और इंडस्ट्रियल इंजन जैसे विविध क्षेत्रों में फैला है। ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में घरेलू मांग और आफ्टरमार्केट की मजबूती के चलते 6.8% की ग्रोथ देखने को मिली है। Greaves Cotton इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में भी सक्रिय रूप से निवेश कर रही है, जो भविष्य की दिशा के अनुरूप है। इंजीनियरिंग और EPC सेक्टरों के लिए भी मिड-टू-हाई सिंगल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगाया जा रहा है।
मजबूत नतीजों के बावजूद, Greaves Cotton के शेयर ने पिछले एक साल में निवेशकों को खास मुनाफा नहीं दिया है, बल्कि 42.07% की गिरावट दर्ज की है। इसका 52-हफ्ते का हाई ₹305.85 और लो ₹155.10 रहा है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹3,800-4,000 करोड़ के आसपास है। वैल्यूएशन की बात करें तो, P/E रेशियो 37.4 से लेकर 113.45 तक भिन्न-भिन्न दिख रहा है, और Price-to-Book रेशियो करीब 2.9 है। निवेशकों के लिए चिंता का विषय कंपनी का लगातार कम बना रहने वाला रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE), जो पिछले तीन सालों से लगभग 4.1% रहा है, और बढ़ता हुआ डेटर डेज (debtor days) है।
सेक्टर में Competitors जैसे Cummins India (बड़ी मार्केट कैप, ज्यादा P/E) और Swaraj Engines (तुलनात्मक मार्केट कैप, कम P/E) की मौजूदगी Greaves Cotton की पोजिशनिंग को दिखाती है। शेयर का RSI (Relative Strength Index) ओवरसोल्ड टेरिटरी में है, जो छोटी अवधि में थोड़ी रिकवरी का संकेत दे सकता है, लेकिन कंपनी को लंबी अवधि के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत ग्रोथ और ऑटो व इंजीनियरिंग सेक्टर को सरकारी समर्थन से कंपनी को फायदा मिलने की उम्मीद है। कुछ एनालिस्ट्स ने हाल ही में रेटिंग डाउनग्रेड की है और ₹180 के आसपास शॉर्ट-टर्म टारगेट दिए हैं। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर होंगी कि कंपनी अपनी मार्जिन सुधार को कैसे बनाए रखती है और EV जैसे नए क्षेत्रों में अपनी पकड़ कैसे मजबूत करती है।