Gravita India का मेटल सेक्टर में दबदबा बढ़ाने का प्लान!
Gravita India Limited (GIL) ने Rashtriya Metal Industries Limited (RMIL) में 100% तक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक अहम डील की है। इसके लिए कंपनी ₹565 करोड़ तक खर्च करेगी। यह अधिग्रहण (Acquisition) ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा, लेकिन इससे Gravita का मेटल सेक्टर में दबदबा काफी बढ़ने की उम्मीद है।
कौन है Rashtriya Metal Industries (RMIL)?
Rashtriya Metal Industries (RMIL) की बात करें तो, यह कंपनी 1946 से कॉपर और कॉपर अलॉय प्रोडक्ट्स, खासकर स्ट्रिप्स और कॉइल्स बनाने में माहिर है। इसके प्रोडक्ट्स UAE, USA, थाईलैंड जैसे कई देशों में एक्सपोर्ट (Export) होते हैं। फाइनेंशियल ईयर 2025 में RMIL का टर्नओवर ₹910 करोड़ रहा, वहीं इसका नेट वर्थ (Net Worth) ₹300 करोड़ और टोटल एसेट्स (Total Assets) ₹558 करोड़ हैं। पिछले दो सालों में भी कंपनी का टर्नओवर लगातार ₹688 करोड़ (FY24) और ₹598 करोड़ (FY23) रहा है। अधिग्रहण के बाद RMIL, Gravita India की सब्सिडियरी (Subsidiary) के तौर पर काम करेगी।
अधिग्रहण के पीछे की रणनीति
इस अधिग्रहण का मुख्य मकसद Gravita India की मेटल सेक्टर में मौजूदगी को बढ़ाना और अपनी क्षमताओं को मज़बूत करना है। RMIL का मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस, प्रोडक्ट्स की रेंज और एक्सपोर्ट नेटवर्क Gravita के लिए बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है।
नए कारोबार में एंट्री
इसी के साथ, Gravita India अब कॉपर रीसाइक्लिंग (Copper Recycling) के कारोबार में भी उतरने का फैसला कर चुकी है। एक स्थापित कंपनी को खरीदना और साथ ही एक नए, जुड़े हुए बिजनेस वर्टिकल में कदम रखना - यह डबल स्ट्रैटेजी Gravita की नॉन-फेरस मेटल्स (Non-ferrous Metals) और रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में लीडरशिप को और मज़बूत करने की मंशा को दिखाती है। यह कदम सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) ट्रेंड्स के चलते और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
फाइनेंशियल असर और आगे की राह
₹565 करोड़ का यह अधिग्रहण Gravita India के लिए एक बड़ा निवेश है, जिसकी FY25 की रेवेन्यू (Revenue) लगभग ₹3,980 करोड़ थी। RMIL के FY25 टर्नओवर के हिसाब से अधिग्रहण का अनुपात (Ratio) करीब 0.62x है, और नेट वर्थ के मुकाबले यह लगभग 1.88x बैठता है। यह एक वैल्यू-एक्रिटिव (Value-Accretive) डील साबित हो सकती है, बशर्ते ड्यू डिलिजेंस में सब कुछ ठीक निकले।
इस डील के 31 मार्च, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। अधिग्रहण के बाद इंटीग्रेशन (Integration) में कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन इसका सीधा फायदा Gravita के रेवेन्यू बेस और मार्केट रीच में बड़ा इजाफा होगा। साथ ही, कॉपर रीसाइक्लिंग जैसे ग्रोथ वाले सेक्टर में एंट्री मिलना कंपनी के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है। निवेशक अब ड्यू डिलिजेंस के नतीजों और इंटीग्रेशन की प्रक्रिया पर बारीकी से नज़र रखेंगे।