केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने भारतीय हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए IIT दिल्ली में एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हैंड}$).loom टेक्नोलॉजी' (CoE-HT) लॉन्च किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल डिजाइन को एकीकृत करके बुनकरों की सालाना आय को ₹6 लाख तक ले जाना है।
बुनकरों की आय बढ़ाने की कवायद
सरकार ने भारतीय हथकरघा (Handloom) क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए एक बड़ी योजना शुरू की है। IIT दिल्ली में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हैंड}$).loom टेक्नोलॉजी' (CoE-HT) की स्थापना इसी दिशा में एक अहम कदम है। इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा लक्ष्य टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट के जरिए बुनकरों की सालाना कमाई को बढ़ाकर ₹6 लाख तक पहुंचाना है।
टेक्नोलॉजी का संगम: AI और डिजिटल डिजाइन
यह पहल हथकरघा उद्योग की पुरानी खामियों को दूर करने के लिए आधुनिक उपकरणों को वैल्यू चेन में लाने पर केंद्रित है। नए CoE-HT को लूम (कपड़ा बुनने की मशीन) के आधुनिकीकरण, कामगारों की एर्गोनॉमिक्स (कार्य-सुविधा) में सुधार और डिजाइन प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर शोध करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डिजिटल टेक्नोलॉजी का उपयोग करके, मंत्रालय का मानना है कि उच्च-मूल्य वाले उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है, जो क्राफ्ट-आधारित उद्योगों में प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने की एक कारगर रणनीति है।
5 नई डिजिटल पहलें
सेंटर के साथ-साथ, सरकार ने पांच अलग-अलग डिजिटल और फंक्शनल प्रोग्राम भी लॉन्च किए हैं। इनमें लूम्स की निगरानी के लिए 'Handloom 4.0' ऐप, ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल 'Handloom e-Vidya', और इस क्षेत्र में स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने के लिए 'HandloomX' प्रोग्राम शामिल हैं। इसके अलावा, 'Threads of Valour' नामक एक प्रोजेक्ट के तहत पुराने डिफेंस टेक्सटाइल्स को नए कपड़ों में बदला जाएगा, जो स्थायी (Sustainable) कच्चे माल को अपनाने के व्यापक उद्योग प्रयासों के अनुरूप है।
आगे की राह और चुनौतियाँ
निवेशकों और हितधारकों के लिए, इन पहलों की सफलता जमीनी स्तर पर टेक्नोलॉजी को अपनाने की दर पर निर्भर करेगी। हथकरघा क्षेत्र को ऐतिहासिक रूप से सप्लाई चेन में बिखराव, प्रीमियम उत्पादों की मांग में उतार-चढ़ाव और नई निर्माण विधियों को अपनाने की उच्च लागत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। बुनकरों की आय बढ़ाने का सरकारी लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसकी प्राप्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि 'Kalagriha Handloom Studio' जैसे नए प्लेटफॉर्म ग्रामीण कारीगरों को आधुनिक, अच्छी कमाई वाले बाजारों से प्रभावी ढंग से जोड़ पाते हैं या नहीं।
अगले पांच वर्षों में 1,000 बुनकरों और पेशेवरों को प्रशिक्षित करने की योजना एक दीर्घकालिक लक्ष्य है। इन पहलों का व्यापक टेक्सटाइल क्षेत्र पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा, मुख्य रूप से उन कंपनियों को प्रभावित करेगा जो हथकरघा कपड़ों को अपने प्रीमियम उत्पाद लाइनों में एकीकृत करती हैं या जो टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी समाधानों में शामिल हैं।
क्या करें निवेशक?
IIT दिल्ली में रिसर्च फेज से परे इन पहलों के विस्तार पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। निवेशक और सेक्टर एनालिस्ट्स 'Handloom 4.0' ऐप के एडॉप्शन मेट्रिक्स, ट्रेनिंग प्रोग्राम से ग्रेजुएट होने वालों की संख्या और मूल्य-वर्धित (Value-added) हथकरघा उत्पादों के निर्यात में किसी भी ठोस वृद्धि पर नजर रखेंगे। इन प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग आवंटन और मौजूदा टेक्सटाइल एक्सपोर्ट इंसेंटिव के साथ उनके इंटीग्रेशन के बारे में भविष्य के सरकारी अपडेट भी इस आधुनिकीकरण की स्थिरता पर स्पष्टता प्रदान करेंगे।
