Tunnel Boring Machines: चीन की पाबंदियों के बीच सरकार का बड़ा दांव, भारत में होगा अब मशीनों का निर्माण

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Tunnel Boring Machines: चीन की पाबंदियों के बीच सरकार का बड़ा दांव, भारत में होगा अब मशीनों का निर्माण

चीन की नई एक्सपोर्ट पाबंदियों के बाद केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने टनल बोरिंग मशीनों (TBM) के स्वदेशी निर्माण पर जोर दिया है। अगले 5 सालों में भारत में **₹7-8 लाख करोड़** के इंफ्रा प्रोजेक्ट्स आने वाले हैं, जिसे देखते हुए विदेशी निर्भरता घटाने की तैयारी है।

चीन की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर उपकरणों पर लगाए गए नए एक्सपोर्ट कंट्रोल के बाद भारत ने अब अपनी रणनीति बदल ली है। केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने साफ कर दिया है कि देश को टनल बोरिंग मशीनों के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। अगले 5 वर्षों में भारत में ₹7 लाख करोड़ से ₹8 लाख करोड़ तक का बड़ा निवेश टनलिंग प्रोजेक्ट्स में होने वाला है।

इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए क्या हैं संकेत?

भारत में अभी तक इन मशीनों के लिए आयात पर निर्भरता रही है। स्वदेशी निर्माण का यह आह्वान भारतीय हैवी इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए लंबी अवधि का बड़ा मौका है। हालांकि, इन मशीनों को बनाना तकनीकी रूप से कठिन काम है, इसलिए सरकार की ओर से मिलने वाली इंसेंटिव्स ही तय करेंगी कि भारतीय कंपनियां ग्लोबल प्लेयर्स का मुकाबला कैसे कर पाएंगी।

क्वालिटी पर सरकार की सख्त नजर

निर्माण के अलावा, सरकार अब हाईवे की क्वालिटी को लेकर और भी ज्यादा सख्त हो गई है। मिनिस्ट्री अब 'नेटवर्क सर्वे व्हीकल्स' के जरिए प्रोजेक्ट्स की बारीकी से जांच कर रही है। खराब काम करने वाली कंपनियों को अब ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

इकोनॉमिक डेटा की अहमियत

आंकड़े बताते हैं कि सड़क निर्माण में खर्च होने वाले हर ₹100 से देश की अर्थव्यवस्था को ₹325 का लाभ होता है। भारत ने लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को 16% से घटाकर अब 9% तक ला दिया है। वहीं हाईवे नेटवर्क भी 91,000 किमी (2014) से बढ़कर अब 1,46,500 किमी से ज्यादा हो गया है। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो क्वालिटी मानकों पर खरी उतरती हैं और जिन्हें सरकारी प्रोत्साहन का लाभ मिल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.