कॉन्ट्रैक्ट्स में मिली बड़ी राहत
वित्त मंत्रालय के इस अहम ऐलान से उन सरकारी ठेकेदारों को बड़ी राहत मिली है जो पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण अपने प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में असमर्थ थे। "फोर्स मेजर" घोषित होने के बाद, जिन ठेकेदारों के प्रोजेक्ट्स पर इसका असर पड़ा है, उन्हें 2 से 4 महीने तक की अतिरिक्त समय-सीमा बिना किसी जुर्माने के दी जाएगी। शर्त यह है कि वे 27 फरवरी, 2026 से पहले तक ठीक-ठाक स्थिति में हों। यह कदम प्रोजेक्ट्स की निरंतरता बनाए रखने और बाहरी झटकों से निपटने में मदद करेगा।
सप्लाई चेन की फ्रजिलिटीज़ हुई उजागर
सरकार के इस कदम से भले ही तत्काल राहत मिल गई हो, लेकिन इसने भारत के डिफेंस और ड्रोन सप्लाई चेन में मौजूद गहरी और पुरानी कमजोरियों को भी सामने ला दिया है। ये सेक्टर महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स और टेक्नोलॉजी के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं, जो इन्हें भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार में आने वाली बाधाओं के प्रति बेहद संवेदनशील बनाता है। महत्वपूर्ण पार्ट्स के लिए घरेलू उत्पादन की सीमित क्षमता और जटिल लॉजिस्टिक्स इन समस्याओं को और बढ़ा देते हैं। वर्तमान में, कम बफर स्टॉक वाली वैश्वीकृत सप्लाई चेन इस भेद्यता को और बढ़ाती हैं।
दीर्घकालिक लचीलेपन (Resilience) की ज़रूरत
'फोर्स मेजर' की घोषणा अल्पावधि में स्थिरता तो प्रदान करती है, लेकिन ड्रोन और डिफेंस सेक्टर के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए इन सप्लाई चेन की कमजोरियों को दूर करना बेहद जरूरी है। अब समय आ गया है कि हम प्रतिक्रियाशील संकट प्रबंधन से आगे बढ़कर सक्रिय रूप से अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करें। इसमें सोर्सिंग का विविधीकरण (diversifying sourcing), महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और समग्र सप्लाई चेन के लचीलेपन को मजबूत करना शामिल है। 'मेक इन इंडिया' (Make in India) और ड्रोन के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसी सरकारी पहलें, रक्षा बजट में वृद्धि के साथ मिलकर, इस क्षमता के निर्माण और निरंतर विकास का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
