राज्यों को क्यों मिलेगा इंसेंटिव?
सरकार ने FY 2026-27 के लिए कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए राज्यों को स्पेशल असिस्टेंस देने वाली स्कीम (SASCI) में यह इंसेंटिव प्रोग्राम जोड़ा है। इसका मकसद देश भर में माइनिंग ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करवाना और उन्हें जल्द से जल्द चालू करवाना है। यह इंसेंटिव 'पहले आओ, पहले पाओ' (First-come, First-served) बेसिस पर दिया जाएगा, जिससे राज्य तेजी से रिफॉर्म्स अपनाएं और प्रक्रियाओं को बेहतर बनाएं।
रिफॉर्म्स और इंसेंटिव का कनेक्शन
इस स्कीम के तीन मुख्य हिस्से हैं। पहला, उन राज्यों को इनाम मिलेगा जो नेशनल माइनिंग पोर्टल के साथ इंटीग्रेशन और सालाना ऑक्शन कैलेंडर जैसी जरूरी रिफॉर्म्स लागू करेंगे। दूसरा, प्रमुख मिनरल ब्लॉक की सफल नीलामी पर इंसेंटिव मिलेगा, खासकर उन ब्लॉक पर जिनमें फॉरेस्ट, एनवायरनमेंट और जमीन अधिग्रहण से जुड़े क्लीयरेंस पहले से हों। इससे प्रोजेक्ट शुरू होने का समय कम होगा। तीसरा, इंसेंटिव राज्य की परफॉर्मेंस पर आधारित होगा, जिसे स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स (SMRI) के जरिए मापा जाएगा।
माइनिंग सेक्टर में ग्रोथ की उम्मीद
इस पहल से माइनिंग सेक्टर में बड़े रिफॉर्म्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। राज्यों को माइनिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाने और टेक्नोलॉजी-आधारित मॉनिटरिंग अपनाने के लिए प्रोत्साहित करके, सरकार का लक्ष्य ओवरऑल मिनरल प्रोडक्शन को बढ़ाना, रेवेन्यू कलेक्शन में सुधार करना और सेक्टर के गवर्नेंस फ्रेमवर्क को मजबूत करना है।
