सड़क परिवहन मंत्रालय ने हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब ठेकेदारों का परफॉरमेंस सिक्योरिटी डिपॉजिट उनकी रेटिंग से तय होगा, जिससे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
सड़क परिवहन मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की बोली और निष्पादन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने पुरानी 5% की फिक्स्ड परफॉरमेंस सिक्योरिटी को अब रेटिंग आधारित सिस्टम में बदल दिया है।
रेटिंग का गणित और फायदा
नियमों के मुताबिक, जिन ठेकेदारों की रेटिंग 80% से ऊपर है, उन्हें अब केवल 3% सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा। वहीं, 70% से 80% के बीच रेटिंग वाले ठेकेदारों को 4% और 70% से कम रेटिंग वाली कंपनियों को 5% डिपॉजिट देना अनिवार्य होगा। इस बदलाव से अच्छी रेटिंग वाली कंस्ट्रक्शन कंपनियों का वर्किंग कैपिटल बचेगा और उनका कैश फ्लो बेहतर होगा। इसके अलावा, प्रोजेक्ट में देरी और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए सरकार ने एक नया फॉर्मूला आधारित सिस्टम भी पेश किया है।
नए जोखिम और चुनौतियां
इस बदलाव में कुछ सख्त शर्तें भी जोड़ी गई हैं। प्रोजेक्ट साइट पर किसी भी घातक दुर्घटना (fatal accident) के लिए कंपनियों पर अनिवार्य आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा, जो सीधे तौर पर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करेगा। साथ ही, बड़े विवादों के लिए आर्बिट्रेशन (arbitration) के नियमों को सख्त कर दिया गया है, जिससे कंपनियों के लिए कानूनी लड़ाई के जरिए क्लेम वसूलना अब पहले से कठिन हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए 26 प्रोजेक्ट्स की पहचान की है। निवेशकों को अब इंफ्रा कंपनियों की रेटिंग और उनके सेफ्टी रिकॉर्ड पर बारीक नजर रखने की जरूरत है। यह देखना अहम होगा कि कंपनियां इन नए नियमों के तहत अपनी प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन की रफ्तार और मुनाफे को कैसे बरकरार रखती हैं।
