Gokaldas Exports ने अपने बिज़नेस मॉडल में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। कंपनी अगले पांच साल में यूरोपियन मार्केट में अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाकर **30%** तक ले जाने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी फाइनेंशियल ईयर **2027** में **₹1.25 बिलियन** का भारी निवेश करेगी।
यूरोप की ओर बढ़ते कदम
बेंगलुरु स्थित गार्मेंट मैन्युफैक्चरर Gokaldas Exports अब अपनी रिस्क प्रोफाइल को बैलेंस करने की कोशिश कर रही है। अभी कंपनी का लगभग 69% एक्सपोर्ट बिजनेस अमेरिकी बाजार पर टिका है। कंपनी अब यूरोप के मार्केट में अपनी मौजूदगी को मौजूदा 15% से बढ़ाकर 25% से 30% के बीच ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
निवेश और विस्तार की योजना
इस विस्तार को गति देने के लिए कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए ₹1.25 बिलियन का निवेश निर्धारित किया है। यह पैसा मुख्य रूप से भारत में नई क्षमता जोड़ने और मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के आधुनिकीकरण (Modernization) पर खर्च किया जाएगा। कंपनी पहले ही यूरोप के कई बड़े रिटेलर्स के साथ सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर बातचीत कर रही है।
ग्लोबल मार्केट की चुनौतियां और उम्मीदें
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ग्लोबल अपैरल सेक्टर सुस्त है। इस साल के पहले आठ महीनों में अमेरिका का अपैरल इंपोर्ट 7% गिरकर $49.08 बिलियन रह गया है। हालांकि, Gokaldas के पास 2027 के स्प्रिंग और समर सीजन के लिए ऑर्डर्स अभी भी मजबूत बने हुए हैं।
एक बड़ा ट्रिगर 'भारत-यूरोपीय संघ' (India-EU) के बीच संभावित ट्रेड एग्रीमेंट भी है। अगर यह डील होती है, तो भारतीय टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स को यूरोप में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल सकता है, जो कंपनी के लिए बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा। हालांकि, ट्रेड डील्स की जटिलताओं और बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों को कंपनी की क्षमता बढ़ाने और नए कॉन्ट्रैक्ट्स पर बारीक नजर रखनी होगी।
