Genus Power Infrastructures ने पूरे साल के लिए **₹6,000–6,500 करोड़** का रेवेन्यू गाइडेंस बरकरार रखा है। कंपनी के पास **₹24,000 करोड़** से ज्यादा का मजबूत ऑर्डर बुक है, लेकिन कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता और एग्जीक्यूशन रिस्क निवेशकों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं।
मजबूत ऑर्डर बुक का सहारा
Genus Power Infrastructures ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने रेवेन्यू लक्ष्य को लेकर भरोसा जताया है। 30 जून, 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक ₹24,020 करोड़ के बड़े स्तर पर पहुंच गई है। कंपनी का मुख्य फोकस इस साल 1 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने पर है, जो उसकी ग्रोथ का इंजन माना जा रहा है।
नतीजों का हाल और मार्जिन पर दबाव
जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। रेवेन्यू में 45% की सालाना बढ़ोतरी के साथ यह ₹1,364.9 करोड़ रहा, लेकिन ऑपरेटिंग प्रॉफिट यानी EBITDA मार्जिन 19.1% पर आ गया। मार्जिन में इस नरमी की बड़ी वजह कच्चे माल (Raw Material) की बढ़ती कीमतें हैं। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि कंपनी अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे मैनेज करती है।
क्या हैं एग्जीक्यूशन चुनौतियां?
कंपनी के पास RDSS और Green Energy Corridor 3 जैसे बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स तो हैं, लेकिन टेंडरिंग की रफ्तार में देरी चिंता का विषय है। केरल, तमिलनाडु, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में टेंडरिंग में हो रही देरी से ऑर्डर एग्जीक्यूशन की गति धीमी हो सकती है।
फाइनेंशियल हेल्थ और आगे का रास्ता
कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 1.04 पर है, जिससे वर्किंग कैपिटल का प्रबंधन और कैश फ्लो पर नियंत्रण काफी अहम हो गया है। GIC के साथ पार्टनरशिप के जरिए कंपनी अपनी क्षमता बढ़ाने में जुटी है। फिलहाल, ₹304 के आसपास ट्रेड कर रहे इस शेयर में, नए टेंडर मिलने की रफ्तार और मार्जिन पर कच्चे माल का असर ही तय करेगा कि आगे का सफर कैसा रहेगा।
