Insolvency के जाल से निकली Gayatri Projects, पर ऑडिटर की 'Going Concern' वार्निंग ने बढ़ाई चिंता
Gayatri Projects Ltd. ने अपने लेनदारों (Lenders) के साथ ₹750 करोड़ के वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) के ज़रिए कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से सफलतापूर्वक बाहर निकल गई है। इस कदम से कंपनी अब बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने को तैयार है, क्योंकि यह काफी हद तक कर्ज-मुक्त हो चुकी है और उसके पास ₹5,500 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक है।
📉 फाइनेंशियल तस्वीर: क्या कहता है नंबर?
हालांकि, कंपनी की सालाना रिपोर्ट (FY 2024-25) से इसकी ऑपरेटिंग परफॉरमेंस की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। पिछले साल के ₹679.55 करोड़ की तुलना में स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 33.8% की भारी गिरावट आई है, जो घटकर ₹449.72 करोड़ रह गया। EBITDA में तो 94.6% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो ₹46.54 करोड़ से गिरकर सिर्फ ₹2.52 करोड़ रह गया। कंपनी ने ₹68.80 करोड़ का शुद्ध घाटा (Net Loss) दर्ज किया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹53.02 करोड़ के घाटे से भी ज़्यादा है। कंसॉलिडेटेड बेसिस पर, नेट प्रॉफिट ₹123.89 करोड़ रहा, लेकिन यह मुख्य रूप से एक एसोसिएट से जुड़े अकाउंटिंग एडजस्टमेंट का नतीजा था, जिसने स्टैंडअलोन परफॉरमेंस की कमजोरी को छिपा दिया।
🚩 खतरे की घंटी: ऑडिटर की गंभीर चेतावनी
कंपनी की वित्तीय सेहत गंभीर रूप से कमजोर बनी हुई है। 31 मार्च, 2025 तक नेट वर्थ ₹1,472.91 करोड़ के नेगेटिव में पहुंच गया है, जो कि एक बहुत बड़ा कंसर्न है। लिक्विडिटी पर भी भारी दबाव है, क्योंकि करंट रेशियो (Current Ratio) सिर्फ 0.50 है। सबसे बड़ी चिंता की बात इंडिपेंडेंट ऑडिटर की रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें कंपनी के 'Going Concern' यानी भविष्य में अपने संचालन को जारी रखने की क्षमता पर "मटेरियल अनिश्चितता" (Material Uncertainty) का ज़िक्र किया गया है। यह चेतावनी, CIRP से बाहर निकलने और अकाउंट्स को गोइंग कंसर्न बेसिस पर तैयार करने के बावजूद, कंपनी की लॉन्ग-टर्म वायबिलिटी पर बड़े सवाल खड़े करती है। कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट को लेकर भी ज़्यादा जांच-पड़ताल की ज़रूरत है, जो ऑपरेशनल सफलता से ज़्यादा एक अकाउंटिंग कारनामा लग रहा है। सीक्रेटेरियल ऑडिट रिपोर्ट ने CIRP पीरियड के दौरान रेगुलेटरी फाइलिंग्स में देरी और गैर-अनुपालन (Non-compliance) का भी ज़िक्र किया, जो पिछली गवर्नेंस समस्याओं की ओर इशारा करता है।
🚀 आगे की राह और जोखिम
- खास जोखिम: लगातार ऑपरेटिंग लॉस, ₹5,500 करोड़ की ऑर्डर बुक से पर्याप्त कैश फ्लो जेनरेट करने में असमर्थता, बड़े कंटीजेंट लायबिलिटीज (बैंक गारंटी के लिए ₹652.44 करोड़ और विवादित टैक्स देनदारियों के लिए ₹748.74 करोड़) का सामना करना, बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने का एग्जीक्यूशन रिस्क, और सबसे बड़ी 'Going Concern' की अनिश्चितता।
- आगे क्या देखें: निवेशकों को ऑर्डर बुक से कैश फ्लो जनरेशन, कंटीजेंट लायबिलिटीज के समाधान, और आने वाली फाइलिंग्स में ऑडिटर या मैनेजमेंट से 'Going Concern' पहलू पर किसी भी स्पष्टीकरण पर बारीकी से नज़र रखनी होगी।