₹33,000 करोड़ का मेगा डिफेंस डील: GRSE पहुंचा फाइनल स्टेज पर
GRSE अपने Next Generation Corvette (NGC) प्रोग्राम के लिए ₹33,000 करोड़ के भारी-भरकम कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब है। कंपनी के सूत्रों के अनुसार, कीमत को लेकर बातचीत पूरी हो चुकी है और इस तिमाही के अंत तक डील फाइनल होने की उम्मीद है। यह कॉन्ट्रैक्ट GRSE के ऑर्डर्स को काफी बढ़ाएगा और नौसेना के आधुनिकीकरण में इसकी भूमिका मजबूत करेगा। हालांकि, कंपनी को उम्मीद है कि NGC प्रोग्राम से रेवेन्यू (Revenue) FY28 की दूसरी छमाही से मिलना शुरू होगा, और मुख्य वित्तीय लाभ FY29 के बाद से ही नजर आएगा। मौजूदा समय में कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹32,000 से ₹35,000 करोड़ के बीच है और इसका P/E रेश्यो 40 के दशक के मध्य में है, जो इस लंबी रेवेन्यू टाइमलाइन को देखते हुए निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू है।
FY26 में शानदार प्रदर्शन, पर ऑर्डर बुक हुई कम
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) में शानदार प्रदर्शन किया है। रिकॉर्ड प्रॉफिट (Profit) और रेवेन्यू इस तिमाही में बेहतर एग्जीक्यूशन का नतीजा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Q4 FY26 में GRSE का नेट प्रॉफिट 24% बढ़कर ₹303.19 करोड़ रहा, वहीं रेवेन्यू 29% की ग्रोथ के साथ ₹2,119.21 करोड़ पर पहुंच गया। पूरे FY26 के लिए, नेट प्रॉफिट में 42% की बढ़ोतरी हुई जो ₹748 करोड़ रहा, और रेवेन्यू 38% बढ़कर ₹7,002 करोड़ दर्ज किया गया। इस अवधि में कंपनी ने भारतीय नौसेना को आठ युद्धपोत डिलीवर किए। इस जोरदार प्रदर्शन के कारण, GRSE का ऑर्डर बैकलॉग पांच साल में पहली बार ₹20,000 करोड़ के आंकड़े से नीचे आ गया है, और यह अब लगभग ₹15,324 करोड़ पर है।
डिफेंस सेक्टर में ग्रोथ और कॉम्पिटिशन
GRSE भारत के बढ़ते डिफेंस शिपबिल्डिंग सेक्टर में काम करती है, जिसे 'मेक इन इंडिया' जैसे सरकारी प्रोग्राम्स और रक्षा खर्च में बढ़ोतरी का सहारा मिल रहा है। भारतीय नौसेना का बजट भी बढ़ रहा है, जिससे डोमेस्टिक प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा मिल रहा है। NGC प्रोग्राम इसी बड़ी नौसैनिक अपग्रेड योजना का हिस्सा है। GRSE को Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) और Cochin Shipyard Limited (CSL) जैसी कंपनियों से भी मुकाबला करना पड़ता है। MDL का ऑर्डर बुक लगभग ₹32,260 करोड़ का है और मार्केट वैल्यू भी अधिक है, हालांकि GRSE ने हालिया समय में तेज ग्रोथ दिखाई है। CSL के पास करीब ₹22,500 करोड़ का ऑर्डर बुक है और कभी-कभी इसके प्रॉफिट मार्जिन बेहतर रहे हैं। GRSE का मौजूदा P/E रेश्यो 45-46x अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक है, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक भविष्य में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं।
निवेशकों की चिंता: रेवेन्यू का लंबा इंतजार और ऑर्डर बुक गैप
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता NGC प्रोग्राम से रेवेन्यू आने में लगने वाला लंबा समय है। भले ही कॉन्ट्रैक्ट लगभग फाइनल हो गया हो, पर पैसा आने में कई साल लगेंगे, जिससे निवेशकों की उम्मीदों और GRSE के वित्तीय नतीजों के बीच एक अंतर पैदा हो सकता है। प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने के कारण वर्तमान ऑर्डर बुक ₹15,324 करोड़ तक आ गई है, जो ₹20,000 करोड़ के स्तर से नीचे है। भारत की डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया भी धीमी है; उदाहरण के लिए, NGC प्रोग्राम को जून 2022 में शुरुआती मंजूरी मिली, जिसके बाद मई 2024 में RFP जारी हुई और मई 2025 में GRSE सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनी। विकास का यह लंबा समय प्रोजेक्ट में देरी और लागत बढ़ने का जोखिम पैदा करता है।
आउटलुक: GRSE का फोकस ग्रोथ पर, पर रेवेन्यू में देरी
आगे चलकर, GRSE अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाकर, नई टेक्नोलॉजी अपनाकर और अपने बिजनेस में विविधता लाकर प्रदर्शन बनाए रखने का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी नौसेना जहाजों के निर्माण से परे नए अवसरों की तलाश में है और साझेदारी भी तलाश रही है। विश्लेषकों की राय अलग-अलग है, जिनके प्राइस टारगेट ₹1,970 से लेकर ₹3,263 तक हैं, जो GRSE की भविष्य की ग्रोथ और वैल्यूएशन पर अलग-अलग दृष्टिकोण दर्शाते हैं। GRSE भारत के रक्षा खर्च और नौसैनिक उन्नयन से लाभ उठाने की अच्छी स्थिति में है। हालांकि, NGC कॉन्ट्रैक्ट से देरी से मिलने वाले रेवेन्यू का मतलब है कि GRSE के वर्तमान मार्केट वैल्यू को सही ठहराने के लिए निवेशकों को ऑर्डर बुक की ग्रोथ और एग्जीक्यूशन पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
