GE Power India ने FY26 के लिए ₹7 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) घोषित किया है। कंपनी ने **₹306.18 करोड़** का नेट प्रॉफिट (Net Profit) कमाया है, जो पिछले तीन सालों के घाटे से एक बड़ी रिकवरी है। डिविडेंड के लिए एक्स-डेट (Ex-date) 12 मई, 2026 तय की गई है।
GE Power India ने अपने शेयरधारकों को खुशखबरी देते हुए ₹7.00 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने का ऐलान किया है। यह कदम कंपनी की वित्तीय स्थिति में आई मजबूती का बड़ा संकेत है, खासकर लगातार कई सालों के घाटे के बाद। डिविडेंड पाने के लिए पात्र होने की एक्स-डेट (Ex-date) 12 मई, 2026 निर्धारित की गई है।
घाटे से मुनाफे की ओर जोरदार वापसी
कंपनी का यह फैसला एक बड़ी वित्तीय वापसी का नतीजा है। मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के लिए, GE Power India ने ₹306.18 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Net Profit) दर्ज किया है। यह पिछले साल के ₹38.02 करोड़ के शुद्ध घाटे (Net Loss) से एक बड़ा उलटफेर है। कंपनी पिछले कुछ सालों से प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर संघर्ष कर रही थी, FY24 में ₹177.08 करोड़ और FY23 में ₹443.57 करोड़ का घाटा दर्ज किया था।
इस रिकवरी में रेवेन्यू (Revenue) ग्रोथ का भी अहम योगदान रहा। कंपनी ने FY26 में ₹1,269.39 करोड़ का कुल रेवेन्यू बताया, जो पिछले साल के ₹1,047.10 करोड़ से ज्यादा है। नतीजतन, अर्निंग्स पर शेयर (Earnings Per Share) भी सुधरकर ₹37.58 हो गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹30.20 था। मार्च 2026 की तिमाही के नतीजे भी इस ट्रेंड को मजबूत करते हैं, जिसमें ₹316.40 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹102.61 करोड़ का नेट प्रॉफिट हुआ।
बाजार का हाल और निवेशकों के लिए अहम बातें
GE Power India की मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) फिलहाल लगभग ₹5,052.14 करोड़ है। हालिया ट्रेडिंग सेशन में, शेयर 0.68% की बढ़त के साथ ₹751.50 पर बंद हुआ था। इस भाव पर, डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) करीब 0.93% है।
हालांकि, पावर इक्विपमेंट बनाने वाली इस कंपनी के लिए मुनाफे में वापसी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन निवेशकों को इन प्रॉफिट मार्जिन्स (Profit Margins) की स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए। ऐतिहासिक रूप से, कंपनी को कई सालों तक भारी परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण बड़ा घाटा हुआ। भविष्य में, कंपनी की ऑर्डर बुक (Order Book) को बनाए रखने और लागतों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
निवेशकों को यह देखने के लिए भविष्य के तिमाही नतीजों पर नज़र रखनी चाहिए कि क्या कंपनी इस स्तर की प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रख सकती है, या प्रतिस्पर्धी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में उसे फिर से दबाव का सामना करना पड़ सकता है। मुख्य बात यह होगी कि क्या मैनेजमेंट इस परिचालन दक्षता को केवल एक बार के डिविडेंड वितरण से आगे बढ़कर लगातार कैश फ्लो (Cash Flow) और लंबी अवधि के शेयरधारक मूल्य (Shareholder Value) में बदल पाता है।
