G R Infraprojects: ₹3,894 करोड़ के प्रोजेक्ट जीते, पर शेयर क्यों गिरे? निवेशकों की खास चिंताएं!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
G R Infraprojects: ₹3,894 करोड़ के प्रोजेक्ट जीते, पर शेयर क्यों गिरे? निवेशकों की खास चिंताएं!
Overview

G R Infraprojects Ltd. को गुजरात और बिहार में कुल **₹3,894 करोड़** के दो बड़े हाईवे डेवलपमेंट कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं। इन अहम प्रोजेक्ट्स के बावजूद, कंपनी के शेयर शुक्रवार, **27 मार्च 2026** को **2.28%** गिरकर **₹804.50** के स्तर पर बंद हुए।

यह गिरावट निवेशकों की गहरी चिंता को दर्शाती है, जो कंपनी के वैल्यूएशन (Valuation), प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) और हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (Hybrid Annuity Model - HAM) से जुड़ी एग्जीक्यूशन (Execution) चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

कंपनी को गुजरात में ₹1,453.57 करोड़ का एक प्रोजेक्ट मिला है, जिसमें NH-56 के 60.21 किमी लंबे स्ट्रेच को HAM के तहत डेवलप किया जाएगा। इसके अलावा, बिहार में भी ₹2,440.87 करोड़ का एक समान HAM प्रोजेक्ट हासिल हुआ है। कुल मिलाकर, इन नए प्रोजेक्ट्स से कंपनी की ऑर्डर बुक में ₹3,894.44 करोड़ का इजाफा हुआ है।

हालांकि, इन बड़े ऑर्डर के बावजूद, G R Infraprojects के शेयर 27 मार्च 2026 को NSE पर 2.28% की गिरावट के साथ ₹804.50 पर बंद हुए।

निवेशक कंपनी के वैल्यूएशन को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि G R Infraprojects के शेयर सेक्टर के मुकाबले डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे हैं। इसका TTM P/E रेशियो 7.2x-8.75x है, जो इंजीनियरिंग-कंस्ट्रक्शन सेक्टर के औसत 11.09x से काफी कम है। साथ ही, शेयर अपने बुक वैल्यू से नीचे चल रहा है, जिसका P/B रेशियो 0.87x-0.92x है। पिछले पांच सालों में कंपनी की सेल्स ग्रोथ -1.93% रही है, जो निवेशकों की ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी पर चिंता को बढ़ाती है।

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) में सरकार से 40% लागत सपोर्ट और टोल कलेक्शन का कम जोखिम होता है, लेकिन इसमें एग्जीक्यूशन और इंटरिम फंडिंग (Interim Funding) की अपनी चुनौतियां हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में राइट ऑफ वे (RoW) देरी जैसी एग्जीक्यूशन की बाधाएं प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और वित्तीय रिटर्न को प्रभावित कर सकती हैं।

कंपनी के फाइनेंशियल्स में सेल्स ग्रोथ सिर्फ 3.02% (पांच साल में), ROCE (Return on Capital Employed) 13-14% और ऑपरेटिंग प्रॉफिट से इंटरेस्ट कवरेज रेशियो का कमजोर होना भी चिंता का विषय है। शेयर अपने 52-हफ्ते और ऑल-टाइम लो के करीब पहुंच गया है। HAM मॉडल में जोखिम बांटा जाता है, लेकिन यह कुशल एग्जीक्यूशन पर निर्भर करता है। ₹3,894 करोड़ के नए प्रोजेक्ट्स को तय 910 दिनों में पूरा करने में किसी भी देरी से इंटरिम फंडिंग और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव पड़ सकता है।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण आम तौर पर आशावादी है। 12 विश्लेषकों ने "Strong Buy" रेटिंग दी है, जिनका औसत 12 महीने का प्राइस टारगेट ₹1,373.75 है, जो 60% से अधिक के संभावित अपसाइड का संकेत देता है। यूनियन बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के फोकस से सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है। हालांकि, बाजार का मौजूदा सेंटिमेंट एग्जीक्यूशन एफिशिएंसी और प्रॉफिटेबिलिटी की चिंताओं पर हावी है।

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