फुटवियर सेक्टर को बड़ी राहत: MSME के लिए क्वालिटी नियमों की डेडलाइन बढ़ी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
फुटवियर सेक्टर को बड़ी राहत: MSME के लिए क्वालिटी नियमों की डेडलाइन बढ़ी

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सरकार ने नॉन-लेदर फुटवियर बनाने वाले छोटे और मझोले उद्यमों (MSMEs) के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) क्वालिटी कंप्लायंस की समय सीमा को एक साल के लिए बढ़ाकर **31 जुलाई, 2027** कर दिया है। इस फैसले से छोटे निर्माताओं को बड़ी राहत मिली है।

क्या है नया नियम?

सरकार ने फुटवियर उद्योग के लिए गुड्स (Quality Control) ऑर्डर, 2024 के तहत यह बड़ा फैसला लिया है। अब छोटे और माइक्रो गैर-चमड़े के फुटवियर निर्माता 31 जुलाई, 2027 तक BIS क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा कर पाएंगे। यह उन कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत है जिन्हें सर्टिफिकेशन के लिए अधिक समय चाहिए था।

इनोवेशन के लिए भी खुला रास्ता

इसके साथ ही, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक नया नियम भी पेश किया है। अब निर्माता रिसर्च, डिजाइन डेवलपमेंट और टेस्टिंग के लिए सालाना 4,500 जोड़ी तक फुटवियर आयात कर सकते हैं। हालांकि, इन इंपोर्टेड जूतों पर 'बिक्री के लिए नहीं' (NOT FOR SALE) का मार्जिन लगा होना चाहिए और टेस्टिंग के बाद इन्हें स्क्रैप के रूप में निपटाना होगा, यानी इन्हें बेचा नहीं जा सकता।

फुटवियर सेक्टर के लिए क्यों है अहम?

भारतीय फुटवियर सेक्टर क्वालिटी और फॉर्मलाइजेशन की ओर बढ़ रहा है। सरकार का मकसद सस्ते और निम्न-गुणवत्ता वाले आयात को रोकना है। BIS सर्टिफिकेशन यह सुनिश्चित करेगा कि इंपोर्टेड और घरेलू दोनों तरह के प्रोडक्ट क्वालिटी के मानकों पर खरे उतरें।

जहां बड़ी कंपनियां आसानी से इन नियमों का पालन कर लेती हैं, वहीं छोटी कंपनियों को अक्सर लागत और प्रक्रिया की जटिलताओं से जूझना पड़ता है। यह समय सीमा का विस्तार छोटे खिलाड़ियों को अपनी प्रक्रियाओं को अपग्रेड करने का मौका देगा। साथ ही, यह सप्लाई चेन को बनाए रखने में भी मदद करेगा, क्योंकि कई बड़े ब्रांड छोटे निर्माताओं पर कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग सपोर्ट के लिए निर्भर करते हैं।

बड़े कारोबारी संदर्भ में क्या है?

भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री 'प्रीमियम' प्रोडक्ट्स और ब्रांड बिल्डिंग पर फोकस कर रही है। सख्त क्वालिटी नियम संगठित खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, क्योंकि ये अनऑर्गनाइज्ड और निम्न-गुणवत्ता वाले प्रतिस्पर्धियों के लिए एंट्री बैरियर बढ़ाते हैं।

रिसर्च के लिए सीमित आयात की अनुमति देकर, सरकार यह भी मान रही है कि घरेलू उद्योग को वैश्विक डिजाइन ट्रेंड्स के साथ तालमेल बिठाने की जरूरत है। इससे लोकल फर्म्स को क्वालिटी ऑर्डर की भावना का पालन करते हुए नए डिजाइन बनाने और इम्प्रूव करने का मौका मिलेगा।

जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें

हालांकि डेडलाइन में विस्तार से राहत मिली है, लेकिन सरकार क्वालिटी स्टैंडर्ड्स लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। निवेशकों को इस पर नजर रखनी चाहिए कि क्या छोटे निर्माता निर्धारित समय सीमा में सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर पाते हैं।

कंप्लायंस एक महत्वपूर्ण जोखिम बना हुआ है। नई डेडलाइन तक इन मानकों को पूरा करने में विफलता के कारण नियामक बाधाएं या उत्पाद बैन हो सकते हैं। इसके अलावा, उद्योग को कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू व निर्यात बाजारों में मांग में संभावित बदलावों से भी निपटना होगा।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.