भारतीय स्टील कंपनियां एनर्जी की बढ़ती कीमतों के बीच भी अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने में कामयाब रही हैं। घरेलू बाजार में मजबूत डिमांड और **12%** इम्पोर्ट ड्यूटी ने इन्हें सहारा दिया है, लेकिन साल **2027** तक बड़े एक्सपेंशन के दौरान निवेशकों को कर्ज के बोझ पर नजर रखने की जरूरत है।
डिमांड और ट्रेड प्रोटेक्शन का असर
Fitch Ratings की एक हालिया रिपोर्ट ने भारतीय स्टील मैन्युफैक्चरर्स की मजबूती को सराहा है। एनर्जी और कोकिंग कोल की कीमतों में उछाल के बावजूद कंपनियां अपने मुनाफे को बचाने में सफल रही हैं। इसका बड़ा कारण घरेलू बाजार में बुनियादी ढांचे और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लगातार डिमांड है, जिसने कंपनियों को अपनी कीमतें बढ़ाने की ताकत दी है। सरकार की तरफ से लगाए गए 12% के सेफगार्ड ड्यूटी ने विदेशी सस्ते स्टील से होने वाली प्रतिस्पर्धा को भी सीमित कर दिया है।
कैपेसिटी एक्सपेंशन और फाइनेंशियल हेल्थ
इंडस्ट्री का पूरा फोकस अब ग्रोथ पर है। साल 2026 और 2027 के बीच करीब 4 करोड़ टन अतिरिक्त क्रूड स्टील क्षमता जोड़ने की तैयारी है। इस रेस में JSW Steel सबसे आगे है, जो अगले 4 सालों में अपनी क्षमता 40% तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी का POSCO के साथ 60 लाख टन प्रति वर्ष की क्षमता वाला नया प्लांट इस रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है। Fitch ने JSW Steel की रेटिंग में भी सुधार किया है, जिसका श्रेय उनके बेहतर EBITDA और प्रभावी डेट मैनेजमेंट को जाता है।
निवेशकों के लिए रिस्क और मॉनिटरिंग पॉइंट्स
हालांकि सेक्टर अभी स्थिर है, लेकिन निवेशकों को सावधान रहने की भी जरूरत है। बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी पूंजी की जरूरत होती है, जिससे अगर कैश फ्लो सुस्त रहा, तो कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी में कोई बदलाव या विदेशी स्टील का अचानक आना कीमतों पर दबाव बना सकता है। भविष्य में कंपनियों का मार्जिन बनाए रखना उनकी कॉस्ट मैनेजमेंट और लॉन्ग-टर्म डिमांड पर ही टिका होगा।
