Finolex Cables के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है! कंपनी के शेयर आज ₹1,224.50 के 52-हफ्ते के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए। यह तेजी Q1 FY27 में कंपनी के मुनाफे में **53%** की शानदार बढ़त के बाद आई है। हालांकि, कंपनी को अपने कॉपर रॉड बिजनेस में मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण फ्यूल सप्लाई में बड़ी रुकावटों का सामना करना पड़ा है। निवेशक अब इस बात पर नज़र बनाए हुए हैं कि क्या ये सप्लाई बाधाएं बनी रहेंगी और क्या डिमांड की रफ्तार जारी रहेगी।
Q1 में दमदार प्रदर्शन, शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर
Finolex Cables के शेयर पहली तिमाही के नतीजों के ऐलान के बाद ₹1,224.50 के 52-हफ्ते के नए हाई पर पहुँच गए। कंपनी ने इस तिमाही में ₹249.04 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 53.14% ज्यादा है। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में भी 44.26% की जोरदार बढ़त देखी गई और यह ₹2,013.15 करोड़ रहा।
ग्रोथ के पीछे के कारण और ब्रोकरेज की राय
कंपनी के इलेक्ट्रिकल और कम्युनिकेशन केबल सेगमेंट में मजबूत डिमांड की वजह से यह ग्रोथ दर्ज की गई है। नतीजों पर ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस को ₹1,200 से बढ़ाकर ₹1,410 कर दिया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि मजबूत सेल्स परफॉर्मेंस ही स्टॉक में पॉजिटिव आउटलुक की मुख्य वजह है।
कॉपर रॉड बिजनेस में आई बड़ी रुकावट
रेवेन्यू और प्रॉफिट में बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी को इस तिमाही में एक बड़ी ऑपरेशनल दिक्कत का सामना करना पड़ा। कंपनी का कॉपर रॉड बनाने वाला प्लांट पूरे क्वार्टर के दौरान बंद रहा। कंपनी के मुताबिक, यह रुकावट फ्यूल, खासकर LPG और PNG की कमी के कारण हुई, जिसे मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष से जोड़ा गया है। प्रोडक्शन चेन के एक अहम हिस्से में यह शटडाउन एक ऐसा फैक्टर है जिस पर निवेशक बारीकी से नज़र रख रहे हैं। अगर फ्यूल सप्लाई की समस्या बनी रहती है, तो यह कंपनी की प्रोडक्शन कैपेसिटी और ऑपरेटिंग कॉस्ट पर असर डाल सकती है।
आगे की राह: कमोडिटी की कीमतें और जियो-पॉलिटिकल रिस्क
भविष्य में, कंपनी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील रहेगी, खासकर कॉपर की कीमतों में, जो एक बड़ा रॉ मैटेरियल कॉस्ट है। केबल बिजनेस में भले ही डिमांड मजबूत दिख रही है, लेकिन आने वाली तिमाहियों में कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस इस बात पर निर्भर करेगा कि वह इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज करती है और फ्यूल सप्लाई को प्रभावित करने वाले जियो-पॉलिटिकल रिस्क से कैसे निपटती है। निवेशक कॉपर रॉड प्लांट के दोबारा शुरू होने और सप्लाई चेन की दिक्कतों के बीच कंपनी मार्जिन ग्रोथ को कैसे बनाए रखेगी, इस पर मैनेजमेंट की कमेंट्री का इंतजार करेंगे।
