मुनाफे में कैसे आई कंपनी?
कंपनी के नतीजे बताते हैं कि Q3 FY26 में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹365.1 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 0.5% कम है। लेकिन, Profitability में गजब का उछाल आया है। कंपनी का EBITDA 48.4% बढ़कर ₹59.2 करोड़ पर पहुंच गया।
सबसे खास बात यह है कि EBITDA मार्जिन 10.9% से बढ़कर 16.2% हो गया, जो 534 बेसिस पॉइंट का बड़ा सुधार है। इसी का नतीजा है कि नेट प्रॉफिट (PAT) 98.9% बढ़कर ₹35.7 करोड़ रहा। अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी 97.5% बढ़कर ₹3.18 हो गया।
फ्यूचर के लिए बड़ी विस्तार योजनाएं
कंपनी सिर्फ मुनाफे पर ही नहीं रुकी, बल्कि फ्यूचर के लिए बड़े कदम उठा रही है। गुजरात के मुंद्रा में नया प्लांट चालू हो गया है, जहां कुछ महीनों में दो और प्रोडक्शन लाइनें लग जाएंगी। इसके लिए ₹30 करोड़ का अतिरिक्त कैपेक्स (Capex) मंजूर किया गया है। इसके अलावा, अमेरिका में अपनी सब्सिडियरी में $5.50 मिलियन का बड़ा निवेश किया जा रहा है ताकि बड़े डायमीटर वाले और टाइप 4 सिलेंडरों की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई जा सके। इजिप्ट का प्लांट भी मई 2026 तक शुरू होने वाला है।
साल के 9 महीनों के नतीजे
अगर साल के पहले नौ महीनों (9M FY26) के नतीजों को देखें, तो कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 3.3% बढ़कर ₹1,112.4 करोड़ हुआ है, जबकि EBITDA 21.5% बढ़कर ₹163.4 करोड़ और PAT 19.5% बढ़कर ₹101.0 करोड़ रहा।
रिस्क और आउटलुक
हालांकि, निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। कंपनी के इतिहास में रेवेन्यू ग्रोथ और मार्जिन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कुछ रेगुलेटरी मुद्दे भी रहे हैं, जैसे GST डिमांड और फॉरेन एक्सचेंज से जुड़ा मामला। लेकिन, कंपनी का फ्यूचर आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है, खासकर इंडस्ट्रियल गैसों और सिलेंडरों की बढ़ती डिमांड को देखते हुए।