Everest Industries Stocks Crash: रेवेन्यू में **27%** की भारी गिरावट, घाटा बढ़ा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Everest Industries Stocks Crash: रेवेन्यू में **27%** की भारी गिरावट, घाटा बढ़ा
Overview

Everest Industries के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। कंपनी के तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे बेहद निराशाजनक रहे हैं, जिसमें रेवेन्यू में **26.85%** की साल-दर-साल (YoY) भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके चलते, कंपनी का घाटा भी काफी बढ़ गया है।

📉 नतीजों का काला सच

Everest Industries Limited ने Q3 FY26 के लिए जो नतीजे पेश किए हैं, वे कंपनी की खराब वित्तीय हालत को दर्शाते हैं। स्टैंडअलोन (Standalone) रेवेन्यू में 26.85% की भारी गिरावट आई, जो कि पिछले साल की इसी तिमाही में ₹26,883.42 लाख था। वहीं, तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर भी 6.85% की कमी देखी गई। रेवेन्यू में इस गिरावट का सीधा असर कंपनी के प्रॉफिट पर पड़ा है। स्टैंडअलोन प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) ₹4,059.67 लाख के भारी घाटे में तब्दील हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹1,530.94 लाख का घाटा दर्ज किया गया था।

पिछले नौ महीनों (9M FY26) के आंकड़े भी चिंताजनक हैं। स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 17.29% की YoY कमी आई है। FY25 में जहां ₹11.02 लाख का मामूली प्रॉफिट था, वहीं FY26 में यह बढ़कर ₹4,790.57 लाख के घाटे में बदल गया है।

कंसॉलिडेटेड (Consolidated) नतीजों पर नजर डालें तो वहां भी यही तस्वीर दिख रही है। Q3 FY26 में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 23.74% YoY घटकर ₹28,295.34 लाख रहा, और PBT का घाटा बढ़कर ₹4,801.14 लाख हो गया, जो पिछले साल ₹1,984.88 लाख था। पिछले नौ महीनों में भी कंसॉलिडेटेड PBT का घाटा काफी बढ़ा है।

👇 शेयरधारकों की चिंता बढ़ी

Earnings Per Share (EPS) में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्टैंडअलोन Q3 FY26 के लिए EPS ₹(20.01) रहा, जो पिछले साल के ₹(7.49) की तुलना में काफी कम है। इसी तरह, कंसॉलिडेटेड EPS ₹(23.95) रहा, जो पिछले साल ₹(9.78) था।

दोनों सेगमेंट में गिरावट

कंपनी के दोनों मुख्य सेगमेंट - बिल्डिंग प्रोडक्ट्स (Building Products) और स्टील बिल्डिंग्स (Steel Buildings) - में रेवेन्यू में गिरावट देखी गई है। चाहे वह तिमाही हो या नौ महीने की अवधि, दोनों सेगमेंट में YoY प्रदर्शन कमजोर रहा है।

असाधारण मदों का असर

स्टैंडअलोन नतीजों पर एक असाधारण मद (Exceptional Item) का भी असर पड़ा है, जो ₹(1,329.56) लाख का है। यह मुख्य रूप से नए लेबर कोड के तहत अतिरिक्त ग्रेच्युटी (Gratuity) चार्ज के कारण हुआ है, हालांकि ऑफिस प्राइमिस (Office Premises) की बिक्री से हुए प्रॉफिट ने इसे कुछ हद तक कम किया है।

🚩 आगे क्या?

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता प्रदर्शन में लगातार हो रही गिरावट और मैनेजमेंट द्वारा भविष्य को लेकर कोई गाइडेंस (Guidance) न देना है। इस अनिश्चितता के माहौल में कंपनी के लिए वर्तमान चुनौतियों से उबरना और वित्तीय स्थिति को सुधारना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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