कंपनी के नंबर्स क्या कहते हैं?
Enviro Infra Engineers Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के नतीजे जारी किए हैं। स्टैंडअलोन बेसिस पर, Q3 FY26 के लिए रेवेन्यू ऑफ ऑपरेशन्स 21.3% गिरकर ₹17,553.00 लाख रहा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 96.1% की भारी गिरावट आई और यह सिर्फ ₹61.74 लाख पर सिमट गया। बेसिक ईपीएस (EPS) भी पिछले साल के ₹9.06 से गिरकर ₹0.35 पर आ गया।
पिछले नौ महीनों में, स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 2.7% की मामूली बढ़त के साथ ₹67,932.96 लाख दर्ज किया गया। हालांकि, PAT में 58.0% की भारी गिरावट आई और यह ₹3,426.65 लाख रहा। इस अवधि में ₹1,259.11 लाख का एक असाधारण चार्ज (Exceptional Charge) लगाया गया, जिसे सीधे तौर पर कंपनी में हुए धोखाधड़ी के मामले (Fraud Incident) से जोड़ा गया है।
कंसॉलिडेटेड नतीजे भी सुस्त
कंसॉलिडेटेड बेसिस पर, Q3 FY26 में रेवेन्यू 7.9% बढ़कर ₹71,828.59 लाख रहा। लेकिन, PAT में 33.7% की गिरावट देखी गई और यह ₹486.06 लाख पर आ गया। बेसिक ईपीएस (EPS) भी ₹4.00 से घटकर ₹2.75 हो गया।
पिछले नौ महीनों में, कंसॉलिडेटेड PAT में 60.4% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹7,389.33 लाख रहा। इस गिरावट की मुख्य वजह ₹4,525.76 लाख का असाधारण चार्ज है, जो उसी धोखाधड़ी की घटना से जुड़ा है।
मुनाफे की क्वालिटी और ऑडिटर की चिंताएं
स्टैंडअलोन नतीजों में मुनाफे का इतना गिरना मार्जिन में भारी कमी या ऑपरेशनल दिक्कतें दिखाता है, जिस पर धोखाधड़ी के मामले का असर और भी गंभीर हो गया है। नौ महीनों के कंसॉलिडेटेड बेसिस पर ₹45 करोड़ से ज्यादा के असाधारण खर्चे एक बड़ा रेड फ्लैग हैं। ये सीधे बॉटम लाइन पर असर डाल रहे हैं और आंतरिक नियंत्रण (Internal Controls) व गवर्नेंस (Governance) पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ऑडिटर की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उन्होंने कुछ ज्वाइंट ऑपरेशन्स और सब्सिडियरीज की अंतरिम वित्तीय जानकारी (Interim Financial Information) की समीक्षा नहीं की है और प्रबंधन द्वारा प्रमाणित वित्तीय पर निर्भर रहे हैं। ऐसे में, जब धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, तो ऑडिटर के इस सीमित दायरे की जांच निवेशकों और एनालिस्ट्स के लिए जांच का एक मुख्य बिंदु होगी।
सेगमेंट पर भी असर
स्टैंडअलोन सेगमेंट, जैसे EPC & O&M (Water and Waste Water) और रिन्यूएबल बिजनेस, दोनों में रेवेन्यू में साल-दर-साल कमी आई है। खास बात यह है कि रिन्यूएबल बिजनेस सेगमेंट पिछले साल के मुनाफे से इस साल ₹20.35 लाख के नुकसान में चला गया। कंसॉलिडेटेड सेगमेंट में भी रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद सेगमेंट रिजल्ट में गिरावट देखी गई।
ब्याज का बोझ बढ़ा
फाइनेंस कॉस्ट (Finance Costs) में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। स्टैंडअलोन बेसिस पर यह ₹845.94 लाख से बढ़कर ₹999.67 लाख हो गई। कंसॉलिडेटेड बेसिस पर यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा है, जो ₹737.12 लाख से बढ़कर ₹2,441.64 लाख हो गई। बढ़ते कर्ज का यह बोझ कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर और दबाव डाल रहा है।
खतरे की घंटी और आगे का रास्ता
हालांकि कंपनी वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सरकारी प्रोत्साहन वाले सेक्टर में काम करती है, लेकिन धोखाधड़ी के मामले और उसके वित्तीय असर के कारण कंपनी का तत्काल भविष्य चिंताजनक दिख रहा है। कंपनी ने आगे के लिए कोई गाइडेंस (Guidance) नहीं दिया है। स्टैंडअलोन प्रदर्शन में भारी गिरावट, रिन्यूएबल सेगमेंट में नुकसान, बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट और ऑडिटर की सीमित समीक्षा का दायरा, ये सभी प्रमुख जोखिम (Risks) हैं।
निवेशक कंपनी की ओर से धोखाधड़ी की जांच पर प्रतिक्रिया, रिकवरी के प्रयासों और आने वाली तिमाहियों में प्रॉफिटेबिलिटी व निवेशकों का भरोसा बहाल करने की क्षमता पर करीब से नजर रखेंगे। जुलाई 2025 में हुए पिछले साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) के मामले, जिसमें ₹11.15 करोड़ का नुकसान हुआ था, वह भी बार-बार सुरक्षा कमजोरियों को उजागर करता है।