देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए थर्मल पावर एक बार फिर अहम साबित हो रहा है। इसी को देखते हुए EPC कंपनियां थर्मल एनर्जी सेक्टर में महत्वपूर्ण अवसरों को भुनाने के लिए तैयार हैं। अनुमान है कि थर्मल पावर भारत की बिजली जरूरतों का मुख्य जरिया बना रहेगा, जिसके लिए अगले दशक में अरबों डॉलर के निवेश की उम्मीद है।
L&T का बड़ा दांव, अन्य कंपनियां भी रेस में
बड़ी कंपनियां जैसे Larsen & Toubro (L&T) इस मौके का पूरा फायदा उठाने की तैयारी में हैं। L&T अगले दो सालों में लगभग 4-5 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह सेक्टर में अनुमानित 10-15 गीगावाट (GW) के कुल ऑर्डर का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने की कोशिश होगी। दरअसल, भारत की थर्मल पावर क्षमता फाइनेंशियल ईयर 25 में 247 गीगावाट (GW) से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 32 तक 309 गीगावाट (GW) होने की उम्मीद है, जिसके लिए करीब 80 गीगावाट (GW) नए कोयला आधारित पावर प्लांट लगाने होंगे। इस पर कुल 91 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है।
क्यों लौट रहा है थर्मल पावर का दौर?
L&T के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर, Subramanian Sarma के मुताबिक, बढ़ती बेसलोड डिमांड, ऊर्जा सुरक्षा की चिंताएं और पुरानी थर्मल एसेट्स को बदलने की जरूरत जैसे कई कारण थर्मल पावर सेक्टर में वापसी को बढ़ावा दे रहे हैं। दिसंबर तक, थर्मल पावर L&T की ऑर्डर बुक का एक उच्च सिंगल-डिजिट प्रतिशत हिस्सा था, जिसके अगले दो से तीन सालों में थोड़ा बढ़ने की उम्मीद है।
इंडस्ट्री के दूसरे खिलाड़ी और विस्तार योजनाएं
RPG ग्रुप की KEC International भी कई प्राइवेट थर्मल प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगा रही है। इसके एमडी और सीईओ, Vimal Kejriwal का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, थर्मल प्रोजेक्ट्स को और बढ़ावा दे सकते हैं। सरकारी कंपनी NTPC फाइनेंशियल ईयर 2032 तक 30 गीगावाट (GW) क्षमता जोड़ने की योजना बना रही है, जबकि Adani Power का लक्ष्य इसी अवधि तक 24 गीगावाट (GW) थर्मल क्षमता हासिल करना है, जो कि मौजूदा 18.15 गीगावाट (GW) से काफी ज्यादा है। Adani Power ने अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) प्लान के लिए ₹2 लाख करोड़ का फंड तय किया है। Morgan Stanley की रिपोर्ट भी फाइनेंशियल ईयर 27 की पहली छमाही में गैस और हाइड्रो सप्लाई से जुड़े जोखिमों को उजागर करती है, जिससे संकेत मिलता है कि कोयला आधारित थर्मल पावर जनरेशन बढ़ती मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।