Dredging Corporation of India ने अपने पुराने पड़ चुके बेड़े को बदलने के लिए अगले पांच वर्षों में **11** नए वेसल्स खरीदने की बड़ी योजना बनाई है। इसके लिए कंपनी **₹3,560 करोड़** का भारी निवेश करने जा रही है।
सरकारी कंपनी Dredging Corporation of India (DCI) अब अपने पुराने जहाजों से पीछा छुड़ाकर नई टेक्नोलॉजी पर फोकस कर रही है। वर्तमान में कंपनी के पास मौजूद जहाजों की औसत उम्र 23 साल से ज्यादा है, जिसके चलते मेंटेनेंस का खर्चा काफी बढ़ गया है। इस समस्या को सुलझाने के लिए कंपनी अब 11 नए ड्रेजर्स खरीदने की तैयारी में है।
नई साझेदारी और दक्षता (Operational Efficiency)
कंपनी अपनी परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए Hindustan Shipyard Ltd और Mazagon Dock Shipbuilders Ltd के साथ पार्टनरशिप की बातचीत कर रही है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य 'ड्राई-डॉकिंग' स्लॉट्स को सुरक्षित करना है। कंपनी को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से वेसल्स का डाउनटाइम 2 महीने तक कम हो सकेगा, जिससे DCI के 13 जहाजों वाले बेड़े की कार्यक्षमता में सीधा इजाफा होगा।
नई स्ट्रेटेजी: लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स
DCI अब केवल नए उपकरण ही नहीं खरीद रही, बल्कि अपने बिजनेस मॉडल को भी बदल रही है। कंपनी अब मुंबई हार्बर और JN Port जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए 5 साल के लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर ध्यान दे रही है। इसका मकसद रेवेन्यू में स्थिरता लाना है। कंपनी का अगला बड़ा लक्ष्य 2026-27 में 'DCI Dredge Godavari' को ऑपरेशनल करना है।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
आर्थिक दृष्टिकोण से, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कंपनी इस भारी-भरकम पूंजी निवेश (Capex) को अपने मौजूदा कर्ज और लिक्विडिटी के साथ कैसे बैलेंस करती है। हालांकि, पोर्ट ट्रस्ट से मिलने वाले पेमेंट का समय और पुराने जहाजों का खर्च भविष्य के नतीजों पर असर डाल सकता है। निवेशक अब 24 सितंबर, 2026 को होने वाली 50वीं सालाना आम बैठक (AGM) का इंतजार कर रहे हैं, जहां मैनेजमेंट से इन योजनाओं पर और अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
