📉 नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
Q3 FY26 के आंकड़े:
Dredging Corporation of India (DCI) ने इस बार ऑपरेटिंग रेवेन्यू (Operating Revenue) में 14.9% की भारी गिरावट दर्ज की है। यह पिछले साल की Q3 FY25 की ₹324.44 करोड़ की तुलना में घटकर ₹276.07 करोड़ रह गया। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कंपनी को ₹24.63 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में ₹16.06 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया गया था। शेयर पर अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹8.80 के नुकसान में आ गया, जो पिछले साल ₹5.73 प्रति शेयर के मुनाफे से काफी नीचे है।
नौ महीनों (Nine Months) के नतीजे:
वहीं, नौ महीनों (Nine Months) के नतीजे भी कंपनी की कमजोर परफॉरमेंस को दर्शाते हैं। इस अवधि में रेवेन्यू 7.4% बढ़कर ₹730.10 करोड़ पर पहुंचा, लेकिन नेट लॉस बढ़कर ₹82.15 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹27.46 करोड़ था। नौ महीनों का ईपीएस (EPS) ₹29.34 के नुकसान में रहा।
प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर असर:
कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) में भारी गिरावट आई है। Q3 में मुनाफे से सीधे घाटे में जाना मार्जिन पर दबाव और बढ़ते खर्चों को साफ दिखाता है। नौ महीनों में रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद नेट लॉस तीन गुना से ज्यादा हो गया है। कुल खर्चे ₹1192.11 करोड़ रहे, जिसमें अकेले फाइनेंस कॉस्ट (Finance Costs) ही ₹65.02 करोड़ रही।
🚩 कर्ज और जोखिमों पर एक नज़र
बढ़ता कर्ज का बोझ:
सबसे बड़ी चिंता कंपनी पर बढ़ता कर्ज है। 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी का लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग्स (Long-term Borrowings) ₹795.15 करोड़ तक पहुंच गया है, जो FY25 के अंत में ₹669.40 करोड़ था। इसके चलते कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) 0.76:1 से बढ़कर 0.94:1 हो गया है, जो वित्तीय जोखिम को बढ़ाता है।
कर्ज चुकाने की क्षमता पर सवाल:
कंपनी की कर्ज चुकाने की क्षमता (Debt Service Coverage Ratio - DSCR) भी बिगड़ गई है। नौ महीनों के लिए DSCR सिर्फ 0.53:1 रह गया है, जो FY25 के लिए 0.93:1 था। यह दर्शाता है कि ऑपरेटिंग कैश फ्लो से कर्ज की किश्तें चुकाना कंपनी के लिए मुश्किल हो रहा है।
नेट वर्थ (Net Worth) में कमी:
लगातार घाटे के कारण कंपनी का नेट वर्थ (Net Worth) भी लगातार घट रहा है। यह 31 मार्च 2025 को ₹1221.49 करोड़ से घटकर 31 दिसंबर 2025 को ₹1133.41 करोड़ रह गया है।
निवेश और भविष्य का अनुमान:
कैपिटल वर्क-इन-प्रोग्रेस (Capital Work-in-Progress) का ₹759.35 करोड़ तक पहुंचना बताता है कि कंपनी भारी निवेश कर रही है। हालांकि, यह निवेश वर्तमान में कैश फ्लो और कर्ज पर और दबाव बढ़ा सकता है। कंपनी ने अधिकृत शेयर कैपिटल (Authorized Share Capital) को ₹60 करोड़ बढ़ाया है और Cochin Shipyard Limited को ₹111.48 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी किए हैं। मैनेजमेंट की ओर से भविष्य के लिए कोई गाइडेंस (Guidance) या रणनीति पर टिप्पणी न होने से निवेशकों के लिए आगे का रास्ता अनिश्चित बना हुआ है।
