Dreamfolks Services Limited ने हाल ही में खुलासा किया है कि उसे ₹7 करोड़ का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) डिमांड और पेनल्टी ऑर्डर मिला है।
यह ऑर्डर 09 मार्च, 2026 को Bureau of Investigation (South Bengal) द्वारा GST व्यवस्था के तहत जारी किया गया था। इसमें मुख्य रूप से वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए 'प्लेस ऑफ सप्लाई' (Place of Supply) के कथित उल्लंघन का जिक्र है। कुल डिमांड में ₹6.37 करोड़ का टैक्स और ₹0.64 करोड़ का जुर्माना शामिल है।
कंपनी का कहना है कि इस ऑर्डर से उसके फाइनेंसियल या ऑपरेशंस पर फिलहाल कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है। Dreamfolks फिलहाल इस GST डिमांड और पेनल्टी नोटिस को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है।
भले ही कंपनी को तत्काल प्रभाव की उम्मीद नहीं है, ₹7 करोड़ की यह डिमांड और पेनल्टी एक काफी बड़ी राशि है। अगर कंपनी इस चुनौती में सफल नहीं हो पाती है, तो अप्रत्याशित वित्तीय देनदारियां और कानूनी खर्च बढ़ सकते हैं, जो कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और कैश फ्लो को प्रभावित कर सकते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब Dreamfolks टैक्स से जुड़े मुद्दों का सामना कर रही है। इससे पहले भी कंपनी को वेंडर डिफॉल्ट और गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के संबंध में GST डिमांड नोटिस मिल चुके हैं। अगस्त 2024 में एक ऑर्डर आया था, और सितंबर 2024 में ₹1.35 करोड़ का एक और नोटिस मिला था। इसके अलावा, कंपनी ने हाल ही में अपने डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज सर्विस को बंद करने की घोषणा की थी और Q3 FY26 में अपना पहला तिमाही घाटा (Quarterly Loss) भी दर्ज किया था, जो रेवेन्यू में भारी गिरावट और निगेटिव ऑपरेटिंग मार्जिन के साथ आया था।
अब Dreamfolks इस GST ऑर्डर के खिलाफ अपनी कानूनी रणनीति तैयार करेगी। निवेशकों की नजर कंपनी के इस कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रगति पर रहेगी। कंपनी के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि यदि चुनौती असफल रही तो एक बड़ा वित्तीय झटका लग सकता है, साथ ही कानूनी खर्च भी बढ़ेगा। बार-बार टैक्स विवाद कंपनी की साख और निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित कर सकते हैं।
Dreamfolks ट्रैवल एग्रीगेशन स्पेस में काम करती है, जहाँ MakeMyTrip और Yatra Online जैसे बड़े प्लेयर भी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस तरह के टैक्स अनुपालन (Tax Compliance) के मामले में कंपनी कितनी मजबूत है।
आगे चलकर, कंपनी की कानूनी रणनीति, टैक्स अथॉरिटीज से मिलने वाले कोई भी नए आदेश, और प्रबंधन की ओर से इस मामले पर आने वाली कमेंट्री पर निवेशकों को बारीकी से नजर रखनी होगी।