Dixon Technologies Shares: सरकार की मंजूरी मिलते ही लगा 'रॉकेट'! ब्रोकरेज बोले - **50%** तक चढ़ेगा शेयर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Dixon Technologies Shares: सरकार की मंजूरी मिलते ही लगा 'रॉकेट'! ब्रोकरेज बोले - **50%** तक चढ़ेगा शेयर
Overview

Dixon Technologies (India) Ltd. के शेयरों में आज, **10 मार्च 2026** को **6%** से ज़्यादा की जोरदार तेजी देखी गई। ये उछाल सरकार से कंपनी के चीन की HKC Overseas के साथ हुए ज्वाइंट वेंचर (JV) को मिली मंजूरी के बाद आया है।

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Dixon Technologies के लिए यह एक बड़ी डेवलपमेंट है। कंपनी ने चीन की HKC Overseas के साथ मिलकर जो ज्वाइंट वेंचर (JV) बनाया है, उसे सरकार की हरी झंडी मिल गई है। इस कदम से कंपनी भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर में अपनी पोजिशन और मजबूत करेगी। इस डील की उम्मीद में ही शेयर में 6% से अधिक का उछाल देखा गया।

मार्जिन बढ़ाने की नई राह

यह नया ज्वाइंट वेंचर, जिसका नाम Dixon Display Technologies (DDTPL) होगा, डिस्प्ले मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग को इन-हाउस लाने का लक्ष्य रखता है। इससे Dixon की वैल्यू चेन में बड़ा बदलाव आएगा। जानकारों का मानना है कि डिस्प्ले मॉड्यूल असेंबली से कंपनी को अच्छे मुनाफे (Higher Profit Margins) की उम्मीद है। Nomura के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इस वेंचर से FY28 तक Dixon के ओवरऑल मार्जिन में 50 से 100 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है। यह EMS सेक्टर के लिए काफी महत्वपूर्ण है। 10 मार्च 2026 को शेयर की कीमत ₹10,300 और ₹10,500 के बीच रही।

नए प्लांट में बड़ा निवेश

Dixon इस प्रोजेक्ट में करीब ₹1,200 करोड़ का निवेश कर रही है। इसका मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पहले से ही बन रहा है। Q2 FY27 में ट्रायल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है, और FY27 के दूसरी छमाही में यह पूरी तरह से ऑपरेशनल हो जाएगा। शुरुआती फेज में सालाना करीब 2.4 करोड़ (24 Million) स्मार्टफोन डिस्प्ले और 20 लाख (2 Million) लैपटॉप डिस्प्ले बनाने का लक्ष्य है, जिसे बाद में बढ़ाकर 5.5 करोड़ (55 Million) यूनिट्स सालाना तक ले जाया जा सकता है। इस तरह के बैकवर्ड इंटीग्रेशन से कंपनी की वैल्यू एडिशन बढ़ेगी और लॉन्ग-टर्म में मार्जिन ग्रोथ सुनिश्चित होगी।

ग्लोबल लीडर HKC Overseas के साथ पार्टनरशिप

DDTPL में Dixon की 74% हिस्सेदारी होगी, जबकि HKC Overseas के पास बाकी 26% शेयर रहेंगे। HKC एक बड़ा ग्लोबल प्लेयर है और लार्ज-साइज LCD पैनल बनाने वाली टॉप तीन कंपनियों में शामिल है। यह कंपनी टीवी और IT डिस्प्ले की एक लीडिंग सप्लायर भी है। Dixon के कई ग्लोबल मोबाइल क्लाइंट्स के साथ HKC के मौजूदा संबंध, इस ज्वाइंट वेंचर के लिए एक मजबूत टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप साबित होंगे। HKC का डिस्प्ले टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग का लंबा अनुभव DDTPL को तेजी से एक्सपेंड करने में मदद करेगा।

ब्रोकरेज हाउस की राय और वैल्यूएशन

Nomura ने 'Buy' रेटिंग के साथ शेयर का टारगेट प्राइस ₹14,678 रखा है। यह मौजूदा भाव से करीब 50% के अपसाइड का संकेत देता है। उनका अनुमान है कि FY28 की अर्निंग्स पर 45 गुना मल्टीपल लग सकता है। वहीं, दूसरे एनालिस्ट्स और भी ज्यादा आशावादी हैं, जिनका कलेक्टिव टारगेट प्राइस लगभग ₹16,640 है, जो मौजूदा लेवल्स से 62% तक की बढ़ोतरी दिखा सकता है। अगर हम peers की बात करें तो Amber Enterprises का P/E ratio करीब 75 और Voltas का 44 है, जबकि Dixon का P/E ratio 33-44x के आसपास है, जो इसके ग्रोथ आउटलुक को देखते हुए काफी कंपीटिटिव लगता है।

संभावित जोखिम (Potential Risks)

हालांकि, भविष्य की राह में कुछ जोखिम भी हैं। DDTPL जैसे कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज़ को स्केल अप करना एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें लगातार प्रॉफिट कमाने में समय लग सकता है। EMS सेक्टर में कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई जैसे फैक्टर भी Dixon के मार्जिन को प्रभावित कर सकते हैं। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि 2025 में स्टॉक में 34% की गिरावट देखी गई थी और यह 52-हफ्ते के निचले स्तरों पर भी पहुंचा था, जो बताता है कि एग्जीक्यूशन में थोड़ी भी चूक या मार्केट सेंटिमेंट बदलने पर भारी गिरावट का खतरा बना रहता है। सरकारी रेगुलेशन और PLI स्कीम जैसे इंसेंटिव्स का असर भी अहम रहेगा।

भारतीय EMS सेक्टर और Dixon का भविष्य

कुल मिलाकर, भारत का EMS सेक्टर तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। 2030 तक इसके $155 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह ग्रोथ सरकारी सपोर्ट और ग्लोबल 'China+1' सोर्सिंग स्ट्रैटेजी की वजह से संभव है। Nomura का भारत को लेकर पॉजिटिव रुख, जैसे कि 2026 के अंत तक Nifty का 29,300 का टारगेट, Dixon जैसी कंपनियों के लिए एक मजबूत मार्केट का संकेत देता है। कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में बैकवर्ड इंटीग्रेशन की ओर Dixon का झुकाव, इसे इस बड़े बाजार का एक बड़ा हिस्सा कैप्चर करने और शेयरधारकों के लिए लॉन्ग-टर्म वैल्यू बनाने में मदद करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.