Q4 FY26 में प्रदर्शन पर नज़र
Q4 FY26 के नतीजे बताते हैं कि Dixon Technologies को मौजूदा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 2.1% बढ़कर ₹10,511 करोड़ रहा, लेकिन नेट प्रॉफिट में 36% की भारी गिरावट आई और यह ₹256 करोड़ पर पहुँच गया। कंपनी का EBITDA मार्जिन 3.9% पर स्थिर रहा, जो कि PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) के खत्म हो रहे फायदों और कंपोनेंट की बढ़ती लागत का असर दिखाता है।
Vivo JV और डाइवर्सिफिकेशन पर निवेशकों का भरोसा
इसके बावजूद, 13 मई 2026 को Dixon Technologies के शेयरों में लगभग 3-4% का उछाल देखा गया और ये ₹10,491 के स्तर पर ट्रेड कर रहे थे। निवेशकों का यह सकारात्मक रिएक्शन नतीजों से परे, खासकर Vivo के साथ प्रस्तावित जॉइंट वेंचर (JV) की प्रगति और कंपनी की भविष्य की डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रेटेजी से आया है। FY27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ 12-15% रहने की उम्मीद है, जो कि वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय एवरेज सेलिंग प्राइस (ASPs) बढ़ने से आएगी, क्योंकि स्मार्टफोन वॉल्यूम 33 मिलियन यूनिट्स के आसपास स्थिर रहने का अनुमान है। यह मोबाइल बिजनेस में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।
भारत का EMS सेक्टर और Dixon की पोजीशन
Dixon भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर का हिस्सा है, जिसके FY29 तक 27% CAGR से बढ़ने की उम्मीद है। सरकारी इंसेंटिव्स और ग्लोबल 'चाइना+1' स्ट्रेटेजी इस ग्रोथ को सपोर्ट कर रही हैं। हालांकि, हाल के दिनों में कंपनी के शेयर का प्रदर्शन थोड़ा फीका रहा है, पिछले 1 साल में -36.93% की गिरावट आई है और यह 52-हफ्ते के हाई से 45.11% नीचे है। लेकिन, लंबे समय में कंपनी ने शानदार रिटर्न दिया है, 3 साल में 253.68% का गेन दर्ज किया है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹65,701 करोड़ है और TTM P/E रेश्यो करीब 41.50 है। अपने पीयर्स (peers) में सबसे ज़्यादा 24.09% का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) बनाए हुए है, जो Havells India और Blue Star जैसे प्रतिस्पर्धियों से काफी बेहतर है।
एनालिस्ट्स की चिंताएं और शेयर का प्रदर्शन
हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स इस पर चिंता जता रहे हैं। Goldman Sachs ने 'Sell' रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस ₹9,790 रखा है। उनकी चिंता मोबाइल सेगमेंट के कमजोर आउटलुक, बढ़ी हुई DRAM कीमतों और PLI बेनिफिट्स के खत्म होने से मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को लेकर है। Jefferies ने भी 'Hold' रेटिंग और ₹10,280 का टारगेट प्राइस दिया है, जो घटती सेल्स ग्रोथ और कमजोर कंज्यूमर सेंटीमेंट पर आधारित है। कंपनी को इंडस्ट्रियल EMS सेक्टर में डाइवर्सिफाई करने और बैकवर्ड इंटीग्रेशन से फायदे हासिल करने में एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risk) का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रोथ ड्राइवर्स और ब्रोकरेज फर्मों की मिली-जुली राय
इन नियर-टर्म (near-term) बाधाओं के बावजूद, Dixon नए ग्रोथ एरियाज़ पर तेजी से काम कर रही है। कंपनी को उम्मीद है कि FY27 तक IT हार्डवेयर रेवेन्यू तीन गुना हो जाएगा, जिसके पीछे मजबूत ऑर्डर बुक है। इंडस्ट्रियल EMS में रणनीतिक विस्तार नए M&A (मर्जर और अधिग्रहण) के अवसर प्रदान करता है, और बैकवर्ड इंटीग्रेशन से FY28 तक 40-50 bps (बेसिस पॉइंट्स) का मार्जिन सुधार देखने को मिल सकता है। सबसे बड़ा नियर-टर्म कैटेलिस्ट (catalyst) Vivo के साथ जॉइंट वेंचर की संभावित मंजूरी है, जिससे स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में काफी वृद्धि हो सकती है। ब्रोकरेज फर्मों की राय बंटी हुई है: Emkay Global Financial ने ₹12,500 के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है, जबकि Macquarie ने ₹15,000 पर 'Outperform' रेटिंग दी है। Motilal Oswal ने ₹14,600 पर 'Buy' रेटिंग दी है, वहीं Goldman Sachs अपनी 'Sell' रेटिंग और ₹9,790 के टारगेट पर कायम है।
