Dixon Technologies के Q2 नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कंपनी ने **₹21,806 करोड़** का शानदार रेवेन्यू दर्ज किया, लेकिन बढ़ती लागत और सरकारी इंसेंटिव्स कम होने से मार्जिन घटकर **2.8%** रह गया, जिसके चलते स्टॉक **4.25%** गिर गया।
Dixon Technologies (India) Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी की सेल्स में दमदार बढ़त दिखी है, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव बरकरार है। कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 47% बढ़कर ₹21,806 करोड़ पहुंच गया है। हालांकि, ऑपरेटिंग मार्जिन पिछले साल के 3.8% से गिरकर 2.8% पर आ गया है।
मार्जिन पर क्यों पड़ रहा दबाव?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मार्जिन में इस गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, मोबाइल प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का पहला चरण खत्म होने से सरकारी लाभों में कमी आई है। दूसरा, मेमोरी कंपोनेंट्स की महंगी लागत और बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च का असर सीधे कंपनी के मुनाफे पर पड़ा है। इन अतिरिक्त खर्चों को फिलहाल ग्राहकों पर पूरी तरह नहीं डाला गया है, जिसका असर मार्जिन पर दिख रहा है।
अच्छी बात यह है कि कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 19% बढ़कर ₹293 करोड़ रहा है, जिसमें मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट का सबसे बड़ा हाथ है। इन नतीजों के बाद, कंपनी का शेयर ₹11,000 के स्तर पर बंद हुआ।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
कंपनी अपनी निर्भरता मोबाइल सेगमेंट से हटाकर अन्य क्षेत्रों में बढ़ाने के लिए इस साल ₹1,200 करोड़ का भारी निवेश कर रही है। यह पैसा IT हार्डवेयर, डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल और प्रिसिजन मैकेनिकल पार्ट्स जैसी नई कैपेसिटी बनाने में लगाया जा रहा है।
निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि इतनी बड़ी विस्तार योजना के साथ वर्किंग कैपिटल और सप्लाई चेन का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होगी। मेमोरी कीमतों में उतार-चढ़ाव और फॉरेक्स मूवमेंट जैसे ग्लोबल रिस्क भविष्य में कंपनी के मार्जिन को और प्रभावित कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपने नए प्रोजेक्ट्स को कितनी कुशलता से संभालती है और मार्जिन को दोबारा पटरी पर कैसे लाती है।
