Dilip Buildcon अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करने जा रही है। कंपनी अब कंस्ट्रक्शन पर निर्भरता कम कर माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर फोकस बढ़ा रही है। इसका लक्ष्य **FY29** तक अपने कुल मुनाफे का **75%** हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों से हासिल करना है।
कंपनी ने अपने नए लॉन्ग-टर्म रोडमैप, जिसे 'DBL 2.0' नाम दिया गया है, के तहत अपनी पूरी रणनीति को नया रूप दे दिया है। अब तक मुख्य रूप से एक इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनी के तौर पर जानी जाने वाली Dilip Buildcon, अब माइनिंग की ओर कदम बढ़ा रही है। इसका उद्देश्य EPC सेगमेंट की साइक्लिकल चुनौतियों से बचकर स्थिर मुनाफा कमाना है, जिसे घटाकर अब केवल 25% तक सीमित रखा जाएगा।
माइनिंग में मेगा विस्तार
कंपनी का लक्ष्य है कि FY26 में 25 मिलियन टन से कोयला उत्पादन को बढ़ाकर FY29 तक 57 मिलियन टन तक ले जाया जाए। इस विकास में 'Siarmal' प्रोजेक्ट मुख्य भूमिका निभाएगा। अपनी बैलेंस शीट को सुरक्षित रखने के लिए, कंपनी ने इसके लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) का रास्ता चुना है, जिससे मुख्य कंपनी पर कर्ज का दबाव कम रहे।
पोर्टफोलियो में विविधता
कोयला ही नहीं, कंपनी अब अन्य खनिजों की ओर भी रुख कर रही है। इसमें ₹1,750 करोड़ का निवेश वाला 'Pottangi' बॉक्साइट प्रोजेक्ट प्रमुख है। यह प्रोजेक्ट अगले 22 वर्षों तक कंपनी को स्थिर मार्जिन प्रदान करेगा। इसके अलावा, कंपनी 1.5 GW के सोलर एनर्जी प्लेटफॉर्म पर भी विचार कर रही है, जिसे 'InvIT' के जरिए सपोर्ट किया जाएगा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
कंपनी कर्ज घटाने के लिए अब बड़े अधिग्रहणों के बजाय इंटरनल कैश फ्लो का उपयोग कर रही है। हालांकि, निवेशकों को कंपनी की एग्जीक्यूशन क्षमता और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट पर नजर रखनी होगी। बाजार के बदलते नियमों और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच, यह शिफ्ट कंपनी को भविष्य के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद ग्रोथ मॉडल की तरफ ले जाने की कोशिश है।
