Dilip Buildcon के लिए बीता फाइनेंशियल ईयर 2023-24 की चौथी तिमाही (Q4) उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। कंपनी ने ₹62.05 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹170.83 करोड़ की तुलना में 63.7% की एक बड़ी गिरावट है। वहीं, ऑपरेशंस से होने वाली कमाई यानी रेवेन्यू भी 25.7% घटकर ₹2,299.8 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल ₹3,096.1 करोड़ था। कंपनी के EBITDA मार्जिन में भी भारी गिरावट आई है, जो पिछले साल के 21.35% से घटकर इस तिमाही में 17.06% रह गया है।
कंपनी ने इस गिरावट की वजह मार्जिन पर दबाव और घटता हुआ रेवेन्यू बताया है। यह समझना जरूरी है कि पिछले साल के नतीजे बेहतर इसलिए दिख रहे थे क्योंकि उस अवधि में कंपनी ने एसेट (संपत्ति) बेचकर काफी फायदा कमाया था, जिसे एक्सेप्शनल गेन्स कहा जाता है। इस बार ऐसे कोई बड़े एक्सेप्शनल गेन्स नहीं थे, जिस कारण कोर प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव साफ दिख रहा है।
भारतीय कंस्ट्रक्शन और इंफ्रा सेक्टर फिलहाल कुछ मुश्किलों का सामना कर रहा है। सरकारी पहलों से निवेश तो बढ़ रहा है, लेकिन 2025-26 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ धीमी रहने का अनुमान है। खासकर रोड कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर इसका असर दिख रहा है, क्योंकि मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज से प्रोजेक्ट मिलने की रफ्तार थोड़ी कम हुई है। वैल्यूएशन की बात करें तो Dilip Buildcon का P/E रेश्यो करीब 9.3 है, जो कि Larsen & Toubro जैसे बड़े ग्रुप से काफी कम है। यह KNR Constructions और PNC Infratech जैसे अपने प्रतिस्पर्धियों के करीब है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹7.7 हजार करोड़ है।
मार्जिन में आई यह कमी एक बड़ी चिंता का विषय है। EBITDA मार्जिन का इतना गिरना बताता है कि या तो कंपनी की लागतें बढ़ गई हैं या फिर प्रोजेक्ट्स के लिए कीमतें कम मिल रही हैं। विश्लेषकों (Analysts) की राय इस स्टॉक पर मिली-जुली है, जिनमें 'Buy', 'Neutral' और 'Hold' रेटिंग शामिल हैं। टारगेट प्राइस (Target Price) भी फिलहाल स्टॉक में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं जता रहे हैं।
हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का लॉन्ग-टर्म आउटलुक (Outlook) अभी भी मजबूत बना हुआ है, जिसका मुख्य कारण सरकार का लगातार इंफ्रा पर खर्च करना है। कंपनी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह मार्जिन के दबाव को कैसे मैनेज करती है और नए कॉन्ट्रैक्ट्स कैसे हासिल करती है। इसी बीच, कंपनी के बोर्ड ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ₹1 प्रति इक्विटी शेयर का डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है, जिसे शेयरधारकों की मंजूरी का इंतजार है।
